सोना खरीदने की अपील पर बवाल लखनऊ में बंद रहा सर्राफा बाजार, ज्वेलर्स बोले- डराने से और बढ़ेगी मांग

सोना खरीदने की अपील पर बवाल लखनऊ में बंद रहा सर्राफा बाजार, ज्वेलर्स बोले- डराने से और बढ़ेगी मांग

स्टेट ब्यूरो चीफ विष्णु रावत

प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील के विरोध में सोमवार को लखनऊ के सर्राफा कारोबारियों ने बड़ा प्रदर्शन किया। Lucknow Mahanagar Sarrafa Association और All India Jewellers and Goldsmith Federation की प्रदेश इकाई से जुड़े व्यापारियों ने एक दिन के लिए सर्राफा बाजार बंद रखा और आशियाना क्षेत्र में धरने पर बैठकर विरोध जताया। इस दौरान “सर्राफा एसोसिएशन जिंदाबाद” के नारे भी लगाए गए। धरने में शामिल एसोसिएशन के अध्यक्ष Manish Kumar Verma ने कहा कि सर्राफा बाजार पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में सोना न खरीदने की अपील व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ा सकती है। उन्होंने देशभर के ज्वेलर्स और सर्राफा संगठनों से एकजुट होकर इस मुहिम में शामिल होने की अपील की।व्यापारियों का कहना है कि सर्राफा कारोबार से लाखों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। यदि बाजार प्रभावित हुआ तो इसका असर छोटे दुकानदारों, कारीगरों और लाखों श्रमिकों पर पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि सर्राफा कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने बयान पर पुनर्विचार करें। Vinod Maheshwari ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब सोने की खरीद को लेकर प्रतिबंध या डर का माहौल बनाया गया, तब-तब लोगों में इसे खरीदने की उत्सुकता और बढ़ी है। उनका कहना था कि सोने को लेकर लगातार नकारात्मक संदेश देने से इसकी मांग और बढ़ सकती है। उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि भय का वातावरण बनाने के बजाय व्यवहारिक और व्यवस्थित गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लागू की जानी चाहिए। भारत में पहले से बड़ी मात्रा में घरेलू सोना मौजूद है। यदि उसी का सही तरीके से मोनेटाइजेशन और सर्कुलेशन किया जाए तो गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और लाखों ज्वेलर्स को स्थिरता मिलेगी। धरने में Adarsh Vyapari Association UP के प्रदेश अध्यक्ष Rajesh Soni, मनीष वर्मा, मोहित सोनी समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे। राजेश सोनी ने कहा कि भारत में सोना केवल उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि बचत, सुरक्षा, संस्कृति, महिला सशक्तीकरण और करोड़ों परिवारों की आर्थिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में इस क्षेत्र से जुड़े निर्णय लेते समय उद्योग की व्यावहारिक चुनौतियों और आर्थिक प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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