चतुर्थ दिवस की श्रीमद्भागवत कथा में नन्दोत्सव का हुआ भावपूर्ण वर्णन

चतुर्थ दिवस की श्रीमद्भागवत कथा में नन्दोत्सव का हुआ भावपूर्ण वर्णन

हथिगवां/कुण्डा, प्रतापगढ़। हथिगवां क्षेत्र में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण के उपरांत मनाए गए नन्दोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्तिमय वर्णन किया गया। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक श्री देवराज जी महाराज जी ने बताया कि नन्दबाबा के घर आनन्दकन्द भगवान श्रीकृष्ण के प्रकट होते ही सम्पूर्ण ब्रजभूमि हर्ष और उल्लास से भर उठी थी।

कथा के दौरान बताया गया कि गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मंगलगीत, बधाइयों, दान-पुण्य और उत्सव का अद्भुत वातावरण व्याप्त हो गया। नन्दबाबा ने अपने पुत्र के जन्म की खुशी में ब्राह्मणों, साधु-संतों एवं प्रजाजनों को भरपूर दान देकर अपने आनंद का प्रकटीकरण किया।अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक श्री देव व्रत महाराज जी ने कहा कि भगवान का प्राकट्य मानव जीवन में प्रेम, आनंद और मंगल का संचार करता है। नन्दोत्सव का संदेश है कि ईश्वर की कृपा से प्राप्त सुख और आनंद को समाज के साथ साझा करना ही सच्चा उत्सव है।कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और भक्तजन भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की लीलाओं का श्रवण करते रहे। पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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