बारिश में तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार! मथुरा के मुडेशी गांव व्यवस्था पर बड़ा सवाल
मंडल संवाददाता अमित चौहान
जलभराव के बीच निकली शवयात्रा, तेज बारिश में हुआ अंतिम संस्कार… आखिर मोक्ष धामों के विकास पर खर्च हुए करोड़ों रुपये गए कहां?
मथुरा के थाना हाईवे क्षेत्र के वार्ड संख्या-11 स्थित गांव मुडेशी से सामने आई एक तस्वीर ने इंसानियत और सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार, 23 जुलाई को 40 वर्षीय अमर सिंह के निधन के बाद उनकी शवयात्रा जलभराव से भरी गलियों से होकर निकाली गई। श्मशान स्थल पर भी हालात ऐसे थे कि परिजनों और ग्रामीणों को मूसलाधार बारिश के बीच तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि चारों ओर पानी भरा है, ऊपर से बारिश हो रही है और बीच में तिरपाल के सहारे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह पहली बार नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब एक वर्ष पहले भी इसी गांव में एक महिला का अंतिम संस्कार इसी तरह तिरपाल के नीचे करना पड़ा था। उस समय भी वीडियो वायरल हुआ था और व्यवस्था पर सवाल उठे थे, लेकिन हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा वर्षों से मोक्ष धामों के विकास के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन गांवों और कॉलोनियों के अधिकांश श्मशान घाटों की तस्वीर आज भी बदहाल है। कहीं बारिश से बचाव की व्यवस्था नहीं, कहीं पक्के प्लेटफॉर्म नहीं और कहीं जल निकासी का इंतजाम तक नहीं है। यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो “विकसित भारत” का सपना दिखाती है। सवाल यह है कि “जिंदगी के साथ भी… और जिंदगी के बाद भी सम्मान” का दावा आखिर धरातल पर कब दिखाई देगा? अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—मोक्ष धामों के विकास के नाम पर स्वीकृत धनराशि का कितना काम जमीन पर हुआ? क्या संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस मामले का संज्ञान लेकर मुडेशी सहित ऐसे सभी श्मशान घाटों की स्थिति सुधारेंगे, ताकि किसी परिवार को अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार इस तरह की विषम परिस्थितियों में न करना पड़े?












