परंपरा से प्रमाण तक — भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को आधुनिक शोध से जोड़ने का संकल्प

परंपरा से प्रमाण तक — भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को आधुनिक शोध से जोड़ने का संकल्प

पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ़ ऑल एनसीआर 

परम पूज्य आचार्य डॉ. लोकेश मुनिजी के पावन सान्निध्य में अत्यंत सार्थक एवं दूरदर्शी चर्चा का अवसर प्राप्त हुआ।

चर्चा का मुख्य विषय था—भारत की हजारों वर्षों से चली आ रही, समय की कसौटी पर खरी उतरी पारंपरिक ज्ञान-पद्धतियों को आधुनिक विज्ञान, शोध और प्रमाण के आधार पर पुनः समझना, उनका मूल्यांकन करना और जो उपयोगी एवं प्रभावी सिद्ध हों, उन्हें देश की नीतियों तथा जनजीवन से जोड़ना।

भारत के पास आयुर्वेद, प्राकृतिक कृषि, जल-संरक्षण, पशुपालन एवं पशु-चिकित्सा, पंचगव्य, पर्यावरण संरक्षण, आहार-विहार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वास्तु एवं पारंपरिक तकनीकों सहित अनेक क्षेत्रों में विशाल ज्ञान-संपदा है। आवश्यकता न तो हर परंपरा को बिना परीक्षण स्वीकार करने की है और न ही बिना अध्ययन उसे नकारने की। सही मार्ग है—परंपरा + प्रयोग + प्रमाण + आधुनिक विज्ञान।

इसी उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों के वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, कृषि एवं पशुपालन विशेषज्ञों, विश्वविद्यालयों, IIT/IIM जैसे संस्थानों के विद्वानों, पारंपरिक ज्ञान के अनुभवी साधकों तथा नीति-विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक Expert Team बनाने पर विस्तृत विचार हुआ।

इसके लिए केवल एक समिति पर्याप्त नहीं होगी। एक पूर्णकालिक संस्थागत व्यवस्था—Research, Documentation & Policy Centre की आवश्यकता है, जो पारंपरिक विधियों का दस्तावेजीकरण करे, वैज्ञानिक परीक्षण एवं field trials करवाए, परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन करे और प्रमाणित मॉडलों के आधार पर नीति-सुझाव तैयार करे।

ऐसे शोध और प्रमाणित मॉडल को NITI Aayog⁠ तथा भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों, अनुसंधान संस्थानों और राज्य सरकारों के साथ जोड़कर बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में कार्य किया जा सकता है।

पूज्य गुरुदेव ने इस विचार को अपना आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।

मेरा विश्वास है कि भारत को केवल अपनी प्राचीन विरासत पर गर्व ही नहीं करना चाहिए, बल्कि उसका वैज्ञानिक अध्ययन कर जो ज्ञान आज भी प्रासंगिक है, उसे विश्व के सामने प्रमाण के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।

“हमारा उद्देश्य अतीत में लौटना नहीं, बल्कि अतीत के श्रेष्ठ ज्ञान को विज्ञान की कसौटी पर परखकर भविष्य के भारत के निर्माण में उपयोग करना है।”

डॉ. गिरीश जयंतिलाल शाह

सदस्य, भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड,मैनेजिंग ट्रस्टी, समस्त महाजन

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