पांच पंचवर्षीय कार्यकाल, फिर भी विकास की तलाश में रामपुर वासितदली!
कागजों में पूर्ण, धरातल पर अधूरे विकास कार्यों के आरोप; कुआं-जगत, सड़क, पेयजल, हैंडपंप, स्ट्रीट लाइट, शौचालय, आवास और मनरेगा कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने मांगा हिसाब
मिर्जापुर/लालगंज। केन्द्र और राज्य सरकारें जहां ग्राम पंचायतों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने तथा गांवों में विकास की तस्वीर बदलने के लिए लगातार योजनाएं संचालित कर रही हैं, वहीं मिर्जापुर जनपद के लालगंज विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर वासितदली में विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में वर्षों से विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद कई कार्यों का वास्तविक लाभ धरातल पर दिखाई नहीं देता।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत में सड़क, पेयजल, हैंडपंप, कुआं-जगत, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छ भारत मिशन के शौचालय, प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा सहित अन्य विकास कार्यों को लेकर लंबे समय से शिकायतें और सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों में जिन कार्यों को पूर्ण अथवा प्रगति पर दर्शाया गया है, उनमें से कई कार्यों की वास्तविक स्थिति मौके पर जाकर जांचे जाने की जरूरत है।
पांच पंचवर्षीय कार्यकाल के बाद भी सवाल बरकरार
ग्राम पंचायत के प्रधान हाफीज अहमद के लंबे कार्यकाल को लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि लगातार कई पंचवर्षीय कार्यकाल में पंचायत की जिम्मेदारी संभाले जाने के बावजूद गांव में अपेक्षित बुनियादी सुविधाओं और निर्माण कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं दिखाई देती।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण मौके की भौतिक जांच, स्वीकृत परियोजनाओं, तकनीकी अभिलेखों, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण, जियो-टैग फोटो तथा संबंधित सरकारी रिकॉर्ड के मिलान से ही हो सकता है।
कागज पर पूरा विकास या धरातल पर वास्तविकता?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पंचायत में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं, तो उनकी मौजूदा स्थिति क्या है? ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर उन्हें अपेक्षित विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण होने की स्थिति दर्शाए जाने की चर्चा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विकास कार्य वास्तव में मौके पर पूरे हुए हैं या फिर अभिलेखों तक सीमित रह गए?
यदि किसी योजना के तहत सड़क बनी है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? यदि पेयजल व्यवस्था के लिए हैंडपंप अथवा अन्य कार्य स्वीकृत हुए हैं तो वे कितने स्थानों पर स्थापित हुए और वर्तमान में कितने चालू हैं? शौचालय और आवास योजना के लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति क्या है? मनरेगा में जिन कार्यों पर मजदूरी और सामग्री का भुगतान हुआ, वे कार्य मौके पर कहां हैं?
इन सभी सवालों का जवाब रिकॉर्ड और स्थलीय सत्यापन से सामने आ सकता है।
सरकारी धन और जिम्मेदारी का सवाल
ग्रामीणों की शिकायतों में सबसे गंभीर मुद्दा सरकारी धन के उपयोग और उसकी पारदर्शिता से जुड़ा है। यदि किसी विकास कार्य के लिए सरकारी धन जारी हुआ, भुगतान किया गया और रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण दर्शाया गया, लेकिन मौके पर कार्य नहीं मिलता अथवा मानक के अनुरूप नहीं मिलता है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय किया जाना जरूरी है।
वहीं यदि संबंधित कार्य वास्तव में पूर्ण हुए हैं, तो ग्राम पंचायत और विभागीय अधिकारियों के पास उसके प्रमाण उपलब्ध होने चाहिए। इसलिए ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत में पिछले वर्षों के विकास कार्यों की कार्यवार जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
प्रधान के साथ निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
ग्राम पंचायत में विकास कार्य केवल प्रधान की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं होते। योजनाओं की स्वीकृति, तकनीकी परीक्षण, कार्य की निगरानी, माप, भुगतान और अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया में संबंधित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भी भूमिका होती है।
ऐसे में यदि किसी कार्य में अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो जांच केवल ग्राम पंचायत स्तर पर सीमित न रहकर संबंधित अधिकारियों एवं निगरानी तंत्र की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।
जनता पूछ रही—आखिर कहां हुआ विकास?
रामपुर वासितदली के ग्रामीणों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही बताया जा रहा है कि पंचायत में पिछले वर्षों के दौरान स्वीकृत विकास योजनाओं पर कितना सरकारी धन खर्च हुआ और उसके बदले जमीन पर कितना काम हुआ?
ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत के पिछले कई वर्षों के विकास कार्यों की सूची सार्वजनिक की जाए और प्रत्येक कार्य का स्थान, स्वीकृत धनराशि, भुगतान राशि, कार्यदायी संस्था/जिम्मेदार व्यक्ति, कार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि तथा वर्तमान भौतिक स्थिति सामने रखी जाए।
यदि रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण है तो मौके पर उसकी मौजूदगी दिखाई जानी चाहिए और यदि कार्य अधूरा है तो उसे पूर्ण दर्शाने की प्रक्रिया पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
रामपुर वासितदली में उठ रहे सवालों का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि निष्पक्ष स्थलीय जांच और सरकारी अभिलेखों के मिलान से ही संभव है। ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यदि उच्चस्तरीय टीम गठित कर पिछले वर्षों के विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाता है तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई से अधिक गांव के विकास और सरकारी धन के पारदर्शी उपयोग की चिंता है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा गांव के विकास के लिए भेजा गया धन गांव की जरूरतों पर ही खर्च होना चाहिए और जनता को उसके उपयोग का पूरा हिसाब मिलना चाहिए।
प्रशासन से सीधे सवाल
मिर्जापुर जिला प्रशासन और लालगंज विकासखंड के संबंधित अधिकारियों से सवाल है कि—
– रामपुर वासितदली में पिछले वर्षों में कुल कितनी विकास परियोजनाएं स्वीकृत हुईं?
– प्रत्येक योजना पर कितनी धनराशि स्वीकृत और कितनी खर्च हुई?
– कितने कार्यों को पूर्ण दिखाया गया है?
– क्या सभी पूर्ण कार्यों का भौतिक सत्यापन हुआ है?
– मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत कार्य मौके पर मौजूद हैं या नहीं?
– आवास और शौचालय योजना के लाभार्थियों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
– पेयजल, हैंडपंप, कुआं-जगत और स्ट्रीट लाइट से संबंधित कार्यों की वर्तमान स्थिति क्या है?
– यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
इन सवालों के जवाब ही यह स्पष्ट करेंगे कि रामपुर वासितदली में विकास वास्तव में धरातल पर हुआ है या सरकारी अभिलेखों तक सीमित रहा।











