ग्रामीणों की बेहाल स्वास्थ्य और बदहाल अस्पताल
बिहार। जमुई जिला: सिकंदरा प्रखंड के महादेव सिमरिया पंचायत में स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महादेव सिमरिया अपनी बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रहा है। यह अस्पताल जमुई–सिकंदरा पथ के मध्य, जमुई से 12 किलोमीटर और सिकंदरा से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अस्पताल के चारों ओर लगभग 25 गाँव और चार पंचायतें हैं, फिर भी इस अस्पताल में न तो कोई चिकित्सक उपलब्ध है और न कोई स्वास्थ्य कर्मी।
वर्तमान में इस अस्पताल में केवल एक नर्स और दो वार्ड सदस्य (पुरुष व महिला) नियुक्त हैं। सरकार द्वारा यहाँ प्रसव की सारी व्यवस्था की गई है, लेकिन चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी के अभाव में एक भी प्रसव कार्य अस्पताल में नहीं होता। कागज़ों पर प्रसव दिखा दिया जाता है, लेकिन वास्तव में किसी भी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि इस अस्पताल का उद्घाटन कभी माननीय मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा किया गया था। उद्घाटन से लेकर आज तक न तो चिकित्सक तैनात किए गए और न ही उचित स्वास्थ्यकर्मी।
अस्पताल में एक डीजी जनरेटर भी उपलब्ध है, जिसके लिए संवेदक को लगभग दो लाख रुपये सालाना भुगतान किया जाता है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इसका कभी उपयोग नहीं किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि सिविल सर्जन और जिला प्रशासन केवल डॉक्टरों की कमी का रोना रोते हैं और पल्ला झाड़ लेते हैं। सांसद और विधायक भी इस ओर कोई ध्यान नहीं देते।
किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में ग्रामीणों को मजबूरी में 12 किलोमीटर दूर जमुई जिला अस्पताल या सिकंदरा जाना पड़ता है। सरकार के आँकड़ों में इस अस्पताल और स्टाफ पर हर साल 10 लाख से ऊपर का खर्च दिखाया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर यह अस्पताल पूरी तरह से सफेद हाथी साबित हो रहा है।
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