पठाकरका में श्रीमद् भागवत कथा का सातवां दिन,सुदामा चरित्र प्रसंग ने भावुक हुए श्रद्धालुओं
संवाददाता अनिल कुशवाहा
(झांसी) ग्राम पंचायत पठाकरका के बड़ी माता मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन का आयोजन अत्यंत भावपूर्ण और भव्य रहा। कथा के दौरान सुदामा चरित्र प्रसंग का वर्णन किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई तक प्रभावित किया।
कथा वाचन का पावन कार्य पंडित पारस मणि शुक्ला बाल व्यास जी महाराज द्वारा किया गया। उन्होंने अपने मधुर स्वर और भावपूर्ण शैली में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। जैसे ही प्रसंग आया, पंडाल भावनाओं से भर गया और श्रोताओं की आंखें नम हो उठीं। विशेष आकर्षण रहा कृष्ण-सुदामा मिलन की झांकी, जिसे बड़े ही सुंदर और भावपूर्ण ढंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने झांकी का दर्शन कर अपार आनंद और आत्मिक संतोष का अनुभव किया। कथा स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण “जय श्रीकृष्ण, जय सुदामा” के जयकारों से गूंज उठा। आयोजन स्थल पर महिलाओं ने भक्ति गीत गाए और श्रद्धालु उत्साहपूर्वक झांकी का आनंद लेते रहे। कथा में भक्ति संगीत की धुन धर्मेंद्र जागण, पंकज जागण, नीलेश जागण और रानू दीक्षित की टीम ने सजाई। वहीं बाल व्यास की सहयोगी टीम में लक्ष्मी प्रसाद शुक्ला, धर्मेंद्र सिंह, यश प्रताप सिंह, अभी सिंह और देवांश सिंह सक्रिय रूप से मौजूद रहे।
और समस्त मंदिर कमेटी उपस्थित रही। कथा के अंत में सभी श्रद्धालुओं को भोग प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालु कृष्ण-सुदामा मित्रता की झांकी देखकर भावविभोर हो उठे।
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