बेंती कोठी के अस्तबल में ‘विजयराज’ का आगमन,राजाभैया ने सनातन वैदिक परम्परा से किया नए अश्व का स्वागत

बेंती कोठी के अस्तबल में ‘विजयराज’ का आगमन,राजाभैया ने सनातन वैदिक परम्परा से किया नए अश्व का स्वागत

राजा भइया के चाहने वालों की भेंट बनी चर्चा का केंद्र

जिला संवाददाता प्रतापगढ़
अवधेश चंद्र पांडेय

प्रतापगढ़। देश में सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति पर बेबाकी से अपनी बात रखने वाले, उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित व “हॉट सीट” कुंडा से विधायक तथा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुँवर रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भइया’ की लोकप्रियता अब प्रदेश की सीमाओं को पार कर चुकी है। उनकी स्पष्टवादी कार्यशैली और निडर अंदाज़ देशभर में लोगों के दिलों पर असर डाल रहा है।
इसी लोकप्रियता की एक झलक शुक्रवार को उस समय देखने को मिली, जब महाराष्ट्र के एक प्रशंसक ने राजा भइया को मारवाड़ी नस्ल का भव्य और दुर्लभ घोड़ा भेंट किया। ‘विजयराज’ नामक यह घोड़ा अपनी ऊंची कद-काठी, शाही चाल और तेजस्वी व्यक्तित्व के कारण हर किसी का ध्यान खींचता नजर आया।
राजा भइया ने पूरे विधि-विधान के साथ ‘विजयराज’ का पूजन कर उसे बेंती कोठी स्थित अपने ऐतिहासिक अस्तबल में शामिल किया। अस्तबल में ‘विजयराज’ के आगमन से रियासत की शान और बढ़ गई, वहीं यह भेंट राजा भइया के प्रति उनके समर्थकों के गहरे सम्मान और विश्वास का प्रतीक बन गई।
राजनीति के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति राजा भइया की आस्था एक बार फिर सामने आई। समर्थकों का कहना है कि ‘विजयराज’ सिर्फ एक घोड़ा नहीं, बल्कि राजा भइया की लोकप्रियता, सम्मान और जनसमर्थन का जीवंत प्रतीक है, जिसकी चर्चा अब प्रदेश ही नहीं, देशभर में हो रही है।

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