“RTI से मांगे मनरेगा और 15वें वित्त आयोग के रिकॉर्ड, ग्राम पंचायत ने दिया एक ही जवाब—’जानकारी देना संभव नहीं’, अब प्रथम अपील से बढ़ेगा मामला”
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा। ग्राम पंचायत बोरतरा में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत मनरेगा एवं 15वें वित्त आयोग के कार्यों से संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं। आवेदक ताम्रध्वज साहू ने मस्टररोल, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर, कैशबुक, तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति, निरीक्षण प्रतिवेदन सहित अन्य मूल अभिलेखों की जानकारी मांगी थी। ग्राम पंचायत सचिव बसंत यादव एवं जनसूचना अधिकारी ने दोनों आरटीआई आवेदनों पर अलग-अलग पत्र जारी करते हुए केवल एक पंक्ति में उत्तर दिया कि “आपके द्वारा चाही गई जानकारी विषयांतर्गत होने के कारण दिया जाना संभव नहीं है।” हालांकि सूचना न देने का कोई वैधानिक कारण, सूचना का अधिकार अधिनियम की किसी धारा का उल्लेख तथा प्रथम अपीलीय प्राधिकारी का नाम-पता तक नहीं बताया गया। आवेदक का कहना है कि मांगी गई जानकारी सार्वजनिक धन से संचालित योजनाओं के अभिलेख हैं, जिन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने इस जवाब को अधिनियम की धारा 7(8) का उल्लंघन बताते हुए जनपद पंचायत नवागढ़ के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष प्रथम अपील दायर करने की तैयारी कर ली है। अब यह मामला प्रथम अपील में पहुंचेगा, जहां यह तय होगा कि ग्राम पंचायत द्वारा सूचना रोके जाने का निर्णय कानून के अनुरूप था या नहीं। यदि अपील में भी संतोषजनक आदेश नहीं मिलता है, तो मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच सकता है।
जनहित से जुड़े सवाल अब भी बरकरार हैं—जब रिकॉर्ड सार्वजनिक हैं, तो आखिर जानकारी देने से इंकार क्यों?












