???? धान की खेती: किसान की मेहनत, मौसम की चुनौती
धान की खेती का समय आते ही गांवों में हलचल बढ़ जाती है। किसान खेत तैयार करने से लेकर बीज और खाद जुटाने तक दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन हर बार मौसम, महंगाई और व्यवस्था की ढिलाई उनके सामने नई चुनौतियां खड़ी कर देती है।
इस बार कहीं बारिश बहुत कम हुई, तो कहीं इतनी ज्यादा कि खेतों में पानी भर गया। रोपाई देर से शुरू हुई, और जिन जगहों पर शुरू हुई भी, वहां खाद और मजदूरों की कमी आड़े आई। सरकारी केंद्रों पर खाद की किल्लत है, और किसान महंगे दामों पर बाजार से खाद लेने को मजबूर हैं।
खेतों में काम कराने के लिए मजदूरी भी बढ़ी है। ट्रैक्टर और डीजल के दाम बढ़ने से खेती की लागत और बढ़ गई है। ऐसे में छोटे किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं।
कई किसानों ने बताया कि उन्हें अभी तक किसान सम्मान निधि की किश्त नहीं मिली। वहीं बीज भी समय से नहीं मिला। कुछ क्षेत्रों में नकली बीज मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
कुल मिलाकर, धान की खेती अब लाभ का सौदा नहीं रह गई है। यह किसान की जिद और ज़मीन से प्रेम ही है जो हर साल उसे फिर से खेत में उतार देता है — चाहे हालात जैसे भी हों।
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