लोकमाता अहिल्याबाई की धरोहरों के संरक्षण की कवायद तेज

लोकमाता अहिल्याबाई की धरोहरों के संरक्षण की कवायद तेज

रिपोर्ट जय भगवान बघेल मथुरा उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री के निर्देश पर वृंदावन के प्राचीन मंदिर, घाट और बावड़ी का निरीक्षण, जीर्णोद्धार की तैयारी

वृंदावन। तीर्थनगरी वृंदावन में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गुरुवार को अधिकारियों की टीम ने ठाकुर चैन बिहारी जी मंदिर, कालीदह घाट तथा अटल्लाचुंगी क्षेत्र स्थित प्राचीन कुआं और बावड़ी का स्थलीय निरीक्षण कर पुनर्जीवन की संभावनाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के साथ समाज के प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकताओं ने स्थलों की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता की जानकारी दी। प्रतिनिधियों ने बताया कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने देशभर में मंदिरों, घाटों और धर्मस्थलों के निर्माण एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वृंदावन स्थित ये धरोहरें भी उनकी लोकसेवा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक हैं, लेकिन लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बनी हुई हैं। अधिकारियों ने स्थलों की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करते हुए आवश्यक मरम्मत, पुनर्निर्माण और सौंदर्याकरण कार्यों को लेकर जानकारी जुटाई। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण होने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकेगी। इस दौरान निरंजन सिंह धनगर, हरगोविंद धनगर, रघुवीर सिंह धनगर, डॉ. भगवान सिंह धनगर और सूबेदार राजवीर सिंह धनगर सहित समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। जिला सहकारी बैंक मथुरा के अध्यक्ष निरंजन सिंह धनगर ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का जीवन भारतीय संस्कृति, धर्म और लोककल्याण के प्रति समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उनके द्वारा निर्मित धार्मिक स्थलों का संरक्षण इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों के सम्मान से जुड़ा विषय है।

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