मौनी अमावस्या से पूर्व संगम पर आस्था का सैलाब, कड़ाके की ठंड भी नहीं रोक सकी कदम
संवाददाता बिपिन मिश्रा कुंडा प्रतापगढ़
प्रयागराज। धर्म और अध्यात्म की नगरी प्रयागराज में इन दिनों आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। माघ मेले के सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व ‘मौनी अमावस्या’ से पहले ही संगम तट पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। उत्तर भारत में पड़ रही भीषण ठंड और शीतलहर के बावजूद, भक्तों के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आ रही है।
संगम नोज पर तिल रखने की जगह नहीं
मेला क्षेत्र से आ रही तस्वीरों में संगम नोज श्रद्धालुओं से पूरी तरह भरा हुआ दिखाई दे रहा है। देश के कोने- कोने से आ रहे श्रद्धालु संगम की रेती पर अपना डेरा जमा चुके हैं। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, मुख्य स्नान पर्व से पहले ही भीड़ का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, जिससे पूरे मेला क्षेत्र में मिनी कुंभ जैसा नजारा दिखने लगा है।
ठिठुरन पर भारी आस्था
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर सुबह से ही जयघोष गूंज रहे हैं। पारा गिरने के बावजूद, बच्चे हों या बुजुर्ग, सभी बड़ी संख्या में पावन डुबकी लगा रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां गंगा की गोद में आने के बाद ठंड का अहसास खत्म हो जाता है, बस भक्ति का प्रवाह ही शेष रहता है।
सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम
भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन और पुलिस विभाग अलर्ट मोड पर है।पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है।शहर में बाहरी वाहनों के प्रवेश को लेकर रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है।जल पुलिस और गोताखोरों की टीमें संगम तट पर मुस्तैद हैं।
मौनी अमावस्या का महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर संगम स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी कामना के साथ लाखों श्रद्धालु पहले ही प्रयागराज पहुँच चुके हैं और कल्पवासी अपने शिविरों में भजन-कीर्तन में लीन हैं।
ये भी पढ़ें मौनी अमावस्या से पूर्व संगम पर आस्था का सैलाब, कड़ाके की ठंड भी नहीं रोक सकी कदम












