कानपुर गंगा बैराज बना मछली माफियाओं का अड्डा, प्रशासन बना मूकदर्शक
स्टेट संवाददाता विष्णु रावत. कानपुर: गंगा बैराज में मछलियों के अवैध शिकार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मछली माफिया खुलेआम अपनी जान को जोखिम में डालते हुए गंगा नदी में उतर रहे हैं, जबकि पुलिस प्रशासन और सिंचाई विभाग की सुरक्षा टीमें मूकदर्शक बनी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार, बैराज पर तैनात दर्जनों सुरक्षा गार्ड मछुआरों को बेरोक-टोक बैराज के भीतर जाने दे रहे हैं। सवाल उठता है कि यदि इस अवैध गतिविधि के दौरान कोई हादसा होता है, तो आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा?
गौर करने वाली बात यह है कि अटल घाट पर खड़ा सरकारी स्टीमर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता का मजाक उड़ाता नजर आ रहा है। स्टीमर की मौजूदगी के बावजूद बैराज में रोजाना भारी मात्रा में मछलियों का शिकार हो रहा है।
मत्स्य विभाग द्वारा गंगा नदी में नैनी और कतला जैसी मछलियों को छोड़ा जाता है ताकि नदी की सफाई हो सके और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखा जा सके। लेकिन माफिया इन मछलियों को भी अपना निवाला बना रहे हैं।
बताया जा रहा है कि गंगा बैराज से रोजाना कई कुंतल मछलियों का शिकार होता है, जिससे अवैध मछली व्यापार फल-फूल रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि कानपुर कमिश्नरेट पुलिस आखिर कब जागेगी? पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार इस मुद्दे को उठाए जाने के बावजूद कानपुर पुलिस की चुप्पी और निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है।
क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ा हादसा होगा? या फिर यह अवैध धंधा इसी तरह बेरोकटोक चलता रहेगा?
अब देखना यह होगा कि कानपुर कमिश्नरेट पुलिस और संबंधित विभाग कब इस मामले में सख्त कदम उठाते हैं और गंगा बैराज को मछली माफियाओं से मुक्त कराते हैं।
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