“सुनवाई पहले, सूचना बाद में!” RTI अपील में नोटिस व्यवस्था की खुली पोल, 18 जून को मिला पत्र और उसी दिन थी सुनवाई
15 जून की 19 :04 बजे हुई रजिस्ट्री, 18 जून को आवेदक के हाथ पहुंचा नोटिस; पक्ष रखने का अवसर छिनने का आरोप
जिला संवाददाता : ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा। सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दायर एक अपील प्रकरण में नोटिस जारी करने और सुनवाई प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत बेरला द्वारा जारी सुनवाई सूचना पत्र में दिनांक 15/05/2026 अंकित है, जबकि डाक विभाग की रजिस्ट्री रसीद के अनुसार उक्त पत्र 15/06/2026 को शाम 19:04 बजे रजिस्टर्ड डाक से प्रेषित किया गया। हैरानी की बात यह है कि आवेदक ताम्रध्वज साहू को यह पत्र 18 जून को प्राप्त हुआ और उसी दिन सुनवाई भी निर्धारित थी। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत टेमरी से संबंधित सूचना के अधिकार प्रकरण में प्रथम अपील की सुनवाई के लिए जनपद पंचायत बेरला द्वारा नोटिस जारी किया गया था। लेकिन नोटिस निर्धारित सुनवाई तिथि से पहले आवेदक तक नहीं पहुंच सका। परिणामस्वरूप आवेदक सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने से वंचित रह गया। आवेदक का कहना है कि यदि सुनवाई की सूचना समय पर प्राप्त होती तो वह आवश्यक दस्तावेजों और तथ्यों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकता था। ऐसे में नोटिस मिलने और सुनवाई की तिथि एक ही दिन होने से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन प्रतीत होता है।
मामले में उठ रहे बड़े सवाल
पत्र में 15 मई की तिथि अंकित होने के बावजूद रजिस्ट्री 15 जून को क्यों की गई?
जब डाक से पत्र भेजा गया था, तो सुनवाई की तिथि इतनी निकट क्यों रखी गई?
क्या आवेदक को पर्याप्त अवसर दिए बिना सुनवाई करना उचित माना जा सकता है?
सूचना के अधिकार अधिनियम की पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना का पालन हुआ या नहीं?
पुनः सुनवाई की मांग
मामले को लेकर यह मांग उठ रही है कि आवेदक को उचित अवसर प्रदान करने के लिए प्रकरण में पुनः सुनवाई की तिथि निर्धारित की जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की प्रक्रियागत त्रुटियों से बचने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आवश्यक सावधानी बरती जाए। RTI कार्यकर्ताओं का मानना है कि सूचना के अधिकार कानून का उद्देश्य नागरिकों को जानकारी और न्याय दिलाना है, न कि प्रक्रियागत खामियों के कारण उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करना।












