महिला आयोग की सदस्य असुरक्षित, कैसे मिलेगा महिलाओं को न्याय ?
संवाददाता ब्रिजेन्द्र मौर्य
– बेबस महसूस कर रहीं आयोग की सदस्य, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी जानकारी
– एक दुकान के प्रकरण में व्यापारी नेताओं से विवाद के बाद दर्ज कराई थी एफआईआर !
– व्यापारियों ने भी लगाए थे आयोग की सदस्य पर आरोप !
फतेहपुर । महिला आयोग की सदस्य ही फतेहपुर में असुरक्षित हैं तो जिले की महिलाओं को न्याय कहां से मिल पाएगा।
बता दें कि पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए शासन ने महिला आयोग को बनाया था। फतेहपुर में पीड़ित महिलाओं की सुनवाई आयोग की सदस्य अंशू प्रजापति द्वारा की जाती है। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महिला आयोग की सदस्य ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया, कहा कि उनके निजी सचिव अरविंद भदौरिया द्वारा सुनवाई नहीं की जाती है वह स्वयं सुनवाई करती हैं।
कहा कि बहुआ निवासी शाहीन खातून के प्रार्थना पत्र पर 7 अगस्त को आरोपी इरशाद कादरी को बुलाया गया था जिसके साथ कुछ व्यापारी नेता भी आ गए जिन्होंने उनके साथ अभद्रता की। जिनके खिलाफ उनके द्वारा तीन लोगों इरशाद कादरी, अमिताभ शरण बाबी और अभिनव यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन मेरी एफआईआर नहीं दर्ज की गई। आईजी के हस्तक्षेप के बाद 9 सितंबर को एफआईआर लिखी गई। बताया कि फतेहपुर का पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि वह यहां सुनवाई करें। उन्होंने व्यापारी नेता प्रदीप गर्ग के संगठन आदर्श व्यापार मंडल के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि भास्कर संवाददाता के कई सवालों पर महिला आयोग की सदस्य असहज नज़र आईं! भास्कर संवाददाता के सवाल कि जब महिला आयोग की सदस्य पीड़ित हैं तो जनपद की महिलाओं को न्याय कैसे मिलेगा, इस पर अंशू प्रजापति ने कहा कि उनकी सुनवाई फतेहपुर के अधिकारियों ने नहीं की, आईजी के हस्तक्षेप के बाद उनकी एफआईआर लिखी गई। उन्होंने लोकल प्रशासन पर भी आरोप लगाए, कहा कि मामले को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया है। वहीं एक सवाल कि महिला आयोग का काम महिलाओं को न्याय दिलाना है तो जमीन खाली कराने का पत्र जारी करने का क्या आशय था ! इस पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा दुकान के संबंध में प्रार्थना पत्र आया था उसी को लेकर आदेश नहीं, आग्रह किया गया था। निजी सचिव द्वारा आयोग की सुनवाई पर उन्होंने कहा कि वह स्वयं डाक बंगले में सुनवाई करती हैं वह कुछ समय के लिए अंदर गई थीं तभी निजी सचिव का वीडियो बनाया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अभी तक सरकारी कार्य में बाधा की धारा भी मुकदमे में नहीं बढ़ाई है। एक सवाल कि जब आयोग की सदस्य ही अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के आरोपियों को नहीं गिरफ्तार करवा पा रही हैं तो आम महिला न्याय की उम्मीद कैसे करे, इस पर उन्होंने कहा कि मुकदमे में गिरफ्तारी की धाराएं नहीं हैं। वहीं एक सवाल कि महिला पुलिस के रहते आपके साथ दुर्व्यवहार कैसे हो गया तो उन्होंने कहा कि महिला थाने की पुलिस को प्रकरण की पूरी जानकारी है। हालांकि कई सवालों पर आयोग की सदस्य जवाब देने में असहज नज़र आईं। बताते चलें कि बहुआ स्थित एक दुकान के प्रकरण में आयोग की सदस्य अंशू प्रजापति के निजी सचिव और व्यापारी नेताओं के बीच सामान्य वाद विवाद हुआ था जिसके बाद व्यापारियों ने आयोग की सदस्य पर कई गंभीर आरोप लगाए थे जिसके बाद मंगलवार को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को बेबुनियाद बताया और स्वयं को पीड़ित बताया !
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