प्रतापगढ़ प्राइवेट स्कूलों का बढ़ता दबाव“किताब ले जाओ, पैसा धीरे-धीरे देना

प्रतापगढ़ प्राइवेट स्कूलों का बढ़ता दबाव“किताब ले जाओ, पैसा धीरे-धीरे देना

जिला संवाददाता अमित शुक्ला

कापी और किताबों के नाम पर अभिभावकों पर बोझ जनपद में निजी स्कूलों की मनमानी एक बार फिर चर्चा में है। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने का दबाव बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार कई प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से सीधे तौर पर कह रहे हैं “किताब ले जाओ, पैसा धीरे-धीरे दे देना”, लेकिन इस व्यवस्था के पीछे आर्थिक बोझ का बड़ा खेल छिपा हुआ है। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को बाहर से किताबें खरीदने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। स्कूल द्वारा निर्धारित दुकानों या अपने ही काउंटर से किताबें लेना अनिवार्य किया जा रहा है। इन किताबों की कीमत बाजार दर से कहीं अधिक बताई जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि एक ही कक्षा और विषय होने के बावजूद अलग-अलग स्कूलों में किताबें पूरी तरह भिन्न हैं, जिससे पुराने छात्रों की किताबें नए सत्र में काम नहीं आ पातीं। इससे हर साल नई किताबें खरीदना मजबूरी बन जाता है। किस्तों में भुगतान” का जाल स्कूलों द्वारा दी जा रही “धीरे-धीरे पैसा देने” की सुविधा पहली नजर में राहत जैसी लगती है, लेकिन वास्तव में यह अभिभावकों को महंगी किताबें लेने के लिए मजबूर करने का तरीका बन चुकी है। कई अभिभावकों का कहना है कि वे एकमुश्त भुगतान करने में असमर्थ होते हैं, इसलिए मजबूरी में इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं।नियमों कीअनदेखी शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार स्कूलों को किसी विशेष दुकान या प्रकाशन की किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। अभिभावकों की मांग अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूलों द्वारा तय दुकानों की अनिवार्यता खत्म की जाए। NCERT या मानक किताबों को प्राथमिकता दी जाए। किताबों की कीमतों की जांच हो।दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।शिक्षा के नाम पर बढ़ते इस आर्थिक दबाव ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। जरूरत है कि प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से हस्तक्षेप करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी और अभिभावक हितैषी बन सके।

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें