कानून के रखवाले की गाड़ी ही गैरकानूनी
एडिशनल आरटीओ की अनफिट गाड़ी पर सवाल, कार्रवाई कब?”
स्टेट संवाददाता विष्णु रावत.कानपुर: शहर में अवैध स्कूल वैन के खिलाफ अभियान चला रहे परिवहन विभाग के एडिशनल आरटीओ मानवेंद्र सिंह अब खुद सवालों के घेरे में हैं। एक ओर जहां वह सड़क पर दौड़कर नियम तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, वहीं उनकी अपनी सरकारी गाड़ी ही नियमों की धज्जियां उड़ा रही है।
जानकारी के अनुसार, एडिशनल आरटीओ मानवेंद्र सिंह जिस गाड़ी से अभियान चला रहे हैं, उसकी फिटनेस एक साल पहले ही खत्म हो चुकी है। यह गाड़ी एक कमर्शियल वाहन है, जिस पर सफेद नंबर प्लेट (जो केवल प्राइवेट वाहनों के लिए होती है) लगी हुई है। इसके साथ ही इस गाड़ी की फिटनेस का नवीनीकरण नहीं हुआ है, जो कि मोटर वाहन अधिनियम का खुला उल्लंघन है।
एडिशनल आरटीओ के नेतृत्व में चलाई जा रही यह गाड़ी शहर की सड़कों पर दौड़ रही है और इसी से वह अन्य वाहन चालकों पर कार्रवाई भी कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि साहब की गाड़ी में ‘A.R.T.O.’ लिखा हुआ है, और उसमें सवार निजी कर्मचारी उनके इशारे पर गली-कूचों में दौड़ते हुए अन्य गाड़ियों को पकड़ रहे हैं।
जब इस गाड़ी को वाहन चालक देखते हैं तो वे खुद भागने लगते हैं, डरते हैं कि कहीं चालान न कट जाए। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि कानून का पाठ पढ़ाने वाले अधिकारी खुद कब कानून का पालन करेंगे?
विभागीय लापरवाही और दोहरे मापदंड का यह मामला न सिर्फ गंभीर है, बल्कि सरकारी व्यवस्था और जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि क्या एडिशनल आरटीओ खुद की गाड़ी पर कार्रवाई करेंगे या फिर यह मामला भी विभागीय चुप्पी की भेंट चढ़ जाएगा।
प्रमुख सवाल:
क्या बिना फिटनेस के सरकारी गाड़ी चलाना वैध है?
क्या सरकारी पद पर रहते हुए नियमों की अनदेखी जायज़ है?
क्या विभाग इस गंभीर चूक पर कोई कार्रवाई करेगा?
शहरवासियों और जागरूक नागरिकों को अब जवाब का इंतजार है — “कानून सबके लिए बराबर है या नहीं?”
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