शिक्षामित्रों की छह सूत्रीय मांगों को लेकर विधायक को सौंपा ज्ञापन
संवाददाता योगेंद्र सिंह एटा। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह वर्मा से मुलाकात कर शिक्षामित्रों की छह सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने विधायक से मांग की कि शिक्षामित्रों की लंबे समय से लंबित समस्याओं को विधानसभा और प्रदेश सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाए, ताकि उन्हें जल्द न्याय मिल सके।
संघ पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि प्रदेश में करीब 1.43 लाख शिक्षामित्र पिछले 26 वर्षों से बेसिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय तक शिक्षण कार्य करने के साथ ही अधिकांश शिक्षामित्र स्नातक एवं बीटीसी जैसी आवश्यक शैक्षिक योग्यताएं पूरी कर चुके हैं। उनका कहना है कि वे शिक्षक पद के लिए आवश्यक शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संबंधी पात्रताएं रखते हैं, इसके बावजूद उनकी सेवा से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई कि विभागीय स्तर पर आयोजित होने वाली टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्रों को शामिल होने का अवसर दिया जाए। इसके साथ ही लगभग 60 हजार टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों का अध्यापक पद पर समायोजन किया जाए। संघ का कहना है कि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे और टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों के अनुभव एवं योग्यता का लाभ बेसिक शिक्षा विभाग को मिलना चाहिए।
पदाधिकारियों ने वर्ष 2017 में शिक्षामित्रों के आंदोलन के दौरान एटा जनपद के 17 शिक्षामित्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कराने की भी मांग उठाई। उनका कहना था कि इस संबंध में सरकार को सकारात्मक पहल करते हुए शिक्षामित्रों को राहत प्रदान करनी चाहिए।
संघ ने यह भी मांग की कि जब तक शिक्षामित्रों का समायोजन नहीं हो जाता, तब तक उन्हें 12 माह का नियमित मानदेय दिया जाए। इसके साथ ही उनकी सेवा अवधि को 62 वर्ष की आयु तक सुनिश्चित किए जाने की मांग रखी गई। पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षामित्र लंबे समय से विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, इसलिए उनके भविष्य को लेकर सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए।
ज्ञापन में शिक्षकों की तर्ज पर शिक्षामित्रों को भी शिक्षक कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ दिए जाने की मांग की गई। इसके अलावा भर्ती होने पर मानदेय में कटौती किए बिना चिकित्सीय अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
संघ ने सरकार द्वारा पूर्व में जारी मूल विद्यालय वापसी के आदेश को शीघ्र लागू कराने की मांग भी विधायक के समक्ष रखी। पदाधिकारियों ने कहा कि मूल विद्यालय वापसी से शिक्षामित्रों को अपने कार्यस्थल से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है।
शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारियों ने विधायक वीरेंद्र सिंह वर्मा से आग्रह किया कि वे उनकी मांगों को विधानसभा में उठाने के साथ ही प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों एवं नेतृत्व तक पहुंचाएं। विधायक ने शिक्षामित्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनकी मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षामित्रों ने पिछले 26 वर्षों में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में सरकार को उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालते हुए उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
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