वंदे मातरम् पर राजनीति नहीं, राष्ट्रभक्ति की बात हो : यूपी विधानसभा में राजा भइया का दो टूक संदेश

वंदे मातरम् पर राजनीति नहीं, राष्ट्रभक्ति की बात हो : यूपी विधानसभा में राजा भइया का दो टूक संदेश

जिला संवाददाता अवधेश चंद्र पांडेय . प्रतापगढ़:उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सोमवार को वंदेमातरम् को लेकर आयोजित हुई विशेष चर्चा में जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कुंडा विधायक कुंवर रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भइया’ ने भावनात्मक और ओजस्वी उद्बोधन देकर सदन का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वंदे मातरम् किसी दल, धर्म या मजहब का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना का प्रतीक है, जिस पर किसी भी प्रकार की संकीर्ण राजनीति स्वीकार्य नहीं हो सकती, अपने संबोधन की शुरुआत में राजा भइया ने विधानसभा अध्यक्ष का आभार जताते हुए कहा कि वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषय पर महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की अनुमति देकर उन्होंने सदन की गरिमा बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि यह विषय पक्ष और विपक्ष से ऊपर है और पूरे सदन की साझा भावना का प्रतिनिधित्व करता है, राजा भइया ने कहा कि वंदे मातरम् पर हास-परिहास या हल्की टिप्पणी देश की ऐतिहासिक स्मृतियों और शहीदों के बलिदान का अपमान है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि अनगिनत क्रांतिकारी वंदे मातरम् का उद्घोष करते हुए फांसी के फंदे पर चढ़ गए और उनके अंतिम शब्द भी यही रहे। ऐसे में इस गीत के प्रति किसी भी तरह की असंवेदनशीलता राष्ट्रीय चेतना पर आघात है और उन्होंने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव है। भारतीय संस्कृति में धरती को मां के रूप में देखने की परंपरा रही है और वंदे मातरम् उसी परंपरा की अभिव्यक्ति है।

राजा भइया ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में किसी को बलपूर्वक वंदे मातरम् गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, लेकिन जो लोग सार्वजनिक जीवन में हैं, जनप्रतिनिधि हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के सम्मान पर स्पष्ट और सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचाएं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब संविधान सभा ने सर्वसम्मति से वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया, तो आज इस पर विवाद खड़ा करना किस उद्देश्य की पूर्ति करता है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर विधानसभा से पूरे प्रदेश और देश तक जाना चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में राजा भइया ने आह्वान किया कि वंदे मातरम् को चुनावी या सांप्रदायिक बहस का विषय न बनाया जाए, बल्कि इसे शहीदों की स्मृति, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रतीक के रूप में देखा जाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के आरंभ में जब वंदे मातरम् गूंजता है, तो वह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि यह घोषणा होती है कि हम सब सबसे पहले भारतीय हैं।

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