सूचना देने से पहले वसूली का फरमान: ग्राम पंचायत ने कानून के अनिवार्य प्रावधानों को किया नजरअंदाज?”
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के बदले ग्राम पंचायत देवादा द्वारा आवेदक से ₹955 जमा करने की मांग किए जाने का मामला सामने आया है। गंभीर बात यह है कि पंचायत ने न तो मांगे गए दस्तावेजों के कुल पृष्ठों की संख्या बताई है और न ही यह स्पष्ट किया है कि ₹955 की राशि किस नियम, आदेश या अधिसूचना के आधार पर निर्धारित की गई है।
आरटीआई आवेदक ने आरोप लगाया है कि पंचायत द्वारा जारी पत्र में केवल राशि जमा करने को कहा गया है, जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(3) के अनुसार अतिरिक्त शुल्क मांगते समय उसकी गणना का पूरा आधार, प्रति पृष्ठ निर्धारित दर तथा कुल पृष्ठों की संख्या बताना अनिवार्य है।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि पंचायत द्वारा जारी पत्र में प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम, पदनाम एवं पूरा पता तक उल्लेखित नहीं किया गया, जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदक को अपील के अधिकार एवं संबंधित अपीलीय प्राधिकारी की जानकारी देना आवश्यक माना गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी लोक प्राधिकरण द्वारा बिना पृष्ठ संख्या बताए एकमुश्त राशि मांग ली जाती है तो आवेदक यह जान ही नहीं पाता कि शुल्क की गणना किस प्रकार की गई है। इससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
आवेदक ने मांग की है कि ग्राम पंचायत पहले शुल्क निर्धारण का वैधानिक आधार, प्रति पृष्ठ दर, कुल पृष्ठों की संख्या तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम-पता उपलब्ध कराए। अन्यथा मामले को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी एवं राज्य सूचना आयोग के समक्ष चुनौती दी जाएगी।
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