फतेहपुर: पानी बना ज़हर, गांवों में मौत का सन्नाटा

पानी बना ज़हर, गांवों में मौत का सन्नाटा

फतेहपुर के भूजल में घुला क्रोमियम, NGT ने लगाई फटकार

संवाददाता : बृजेन्द्र मौर्य फतेहपुर – उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के कई गांवों में भूजल अब जीवन नहीं, मौत बनकर बह रहा है। धरौली, गोधरौली, आशापुर, अभयपुर और बनियनखेड़ा जैसे गांवों में लोग बरसों से ज़हर घोलते पानी के भरोसे जीने को मजबूर हैं। यहां के हैंडपंपों और कुओं से निकलने वाला पानी क्रोमियम और मरकरी जैसे जहरीले रसायनों से संक्रमित पाया गया है।

जांच रिपोर्टें साफ कहती हैं – इन गांवों का पानी सिर्फ प्रदूषित नहीं, खतरनाक है। लेकिन अफसोस, प्रशासन अब भी आंख मूंदे बैठा है।पानी बना ज़हर, गांवों में मौत का सन्नाटा

बंद फैक्ट्रियों का ज़हर आज भी ज़िंदा

जिन फैक्ट्रियों पर ताले 35 साल पहले लग चुके हैं, उनका केमिकल कचरा आज भी ज़हर बनकर इन गांवों की मिट्टी, हवा और पानी में फैल रहा है। बिना उपचार के छोड़े गए इन रसायनों को कभी खेतों के किनारे फेंका गया, कभी तालाबों में बहाया गया। और नतीजा – अब पूरा इलाका बीमारी की चपेट में है।

धरौली गांव में लिए गए रक्त सैंपल में क्रोमियम व मरकरी की मौजूदगी पाई गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, बच्चों में चर्म रोग, सांस की तकलीफ, बुखार और यहां तक कि कैंसर जैसे लक्षण अब आम हो चले हैं।

NGT नाराज़, सरकार पर गंभीर टिप्पणी

11 जून 2025 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा —

अब तक इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं हुए। अधिकारी शायद इस खतरे की गंभीरता को समझ ही नहीं पाए हैं।

NGT ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं —

हर ग्रामीण को 135 लीटर प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए

प्रभावित गांवों में हर पखवाड़े मेडिकल कैंप लगाए जाएं

स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट दिल्ली भेजना अनिवार्य हो

रासायनिक फैलाव को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं

स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं, अगली सुनवाई 1 जुलाई 2025 को होगी

यदि आवश्यक हुआ तो गर्मियों की छुट्टियों में भी सुनवाई की जाएगी – NGT

एमिकस क्यूरी की टिप्पणी – गांव मर रहे हैं, प्रशासन सो रहा है

अदालत में एमिकस क्यूरी के रूप में पेश हुईं एडवोकेट कात्यायनी ने सरकार की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा —

इन गांवों में न तो शुद्ध पानी है, न इलाज की व्यवस्था और न ही कोई स्थायी समाधान। प्रशासन पूरी तरह असफल रहा है।

अब सवालों के कटघरे में सरकार

क्या सरकार तब जागेगी जब पूरा इलाका ‘कैंसर बेल्ट’ घोषित हो जाएगा

क्या अदालत के निर्देशों के बिना शुद्ध पानी भी लोगों को नहीं मिलेगा

क्या ज़हरीले पानी से मरते गांव सिर्फ आंकड़ों की फाइलों में दर्ज रह जाएंगे

जरूरी है ठोस कार्रवाई, नहीं तो गांव रहेंगे सिर्फ नामों में

सरकार को अब न सिर्फ जांच करनी है, बल्कि जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।

जिन फैक्ट्रियों का कचरा इन हालात के लिए जिम्मेदार है, उन पर न सिर्फ जुर्माना बल्कि आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत, मुआवजा और पुनर्वास योजना दी जाए।

जनपद स्तर पर जल निगरानी समिति बनाकर, गांव-गांव में पारदर्शिता के साथ सूचना साझा की जाए।

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