शव की पहचान में उलझी पुलिस, अंतिम संस्कार के बाद नया दावा:
संवाददाता-अश्वनी कुमार जिला -हाथरस
दो परिवारों ने जताया शव पर अधिकार, अब डीएनए टेस्ट से खुलेगा राज
हाथरस के सासनी क्षेत्र में मिले एक युवक के शव की पहचान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पहले जिस शव की पहचान हासिम के रूप में कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया था और अंतिम संस्कार भी कर दिया गया, अब उसी शव पर दूसरे परिवार ने अपना दावा ठोक दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब डीएनए टेस्ट के जरिए शव की वास्तविक पहचान कराने की तैयारी कर रही है। दरअसल, शनिवार को सासनी-इगलास मार्ग स्थित दुर्गा धाम कॉलोनी के पास एक युवक का शव बरामद हुआ था। पुलिस जांच में मृतक की पहचान गढ़ऊआ निवासी साबिर खां के पुत्र हासिम के रूप में हुई थी। पुलिस ने पंचनामा भरने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया और शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद परिवार ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। मामले में नया मोड़ उस समय आया जब लोहर्रा गांव निवासी नौरंगी लाल अपने परिवार के साथ कोतवाली पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनका 31 वर्षीय पुत्र सुभाष उर्फ सूसा 5 मई की शाम से लापता है। शव मिलने की जानकारी होने पर जब उन्होंने पुलिस द्वारा दिखाए गए कपड़े, कड़ा और सैंडल देखे तो दावा किया कि वह शव उनके बेटे सुभाष का था, न कि हासिम का।
दो अलग-अलग परिवारों के दावे के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले को संवेदनशील मानते हुए पुलिस अधिकारियों ने वैज्ञानिक जांच का सहारा लेने का फैसला किया है।
प्रभारी निरीक्षक विपिन चौधरी ने बताया कि शव का अंतिम संस्कार हो जाने के कारण मामला और जटिल हो गया है। अब गढ़ऊआ और लोहर्रा दोनों परिवारों के सदस्यों के डीएनए सैंपल लिए जाएंगे। जांच रिपोर्ट में जिस परिवार का डीएनए मेल करेगा, कानूनी रूप से शव उसी का माना जाएगा। पुलिस का कहना है कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।












