कोटहा प्राथमिक विद्यालय में लापरवाही का आरोप, बंद गेट के बाहर खड़े रहे नौनिहाल
प्रधानाध्यापिका माया तिवारी व स्टाफ रीतू प्रजापति की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल; हाइवे किनारे बच्चों को विद्यालय के बाहर इंतजार कराने से शिक्षा व्यवस्था और बाल सुरक्षा दोनों पर प्रश्नचिह्न
मेजा/प्रयागराज। उरुवा कोटहा में सरकारी विद्यालयों में बच्चों को समय पर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के दावों के बीच ग्राम पंचायत कोटहा स्थित प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर व्यवस्था की गंभीर स्थिति बयां करती नजर आ रही है। विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगा दिखाई दिया, जबकि नौनिहाल अपने स्कूल बैग के साथ विद्यालय के बाहर खड़े नजर आए। हाइवे/मुख्य मार्ग के किनारे स्थित विद्यालय में बच्चों का इस तरह बाहर इंतजार करना विद्यालय संचालन और जिम्मेदार स्टाफ की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
तस्वीर में विद्यालय परिसर खाली दिखाई दे रहा है और बाहर बच्चे विद्यालय खुलने की प्रतीक्षा करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्यालय के निर्धारित समय पर बच्चों के पहुंचने के बावजूद उन्हें परिसर के अंदर प्रवेश क्यों नहीं मिला? यदि विद्यालय संचालन का समय शुरू हो चुका था, तो यह स्थिति प्रथम दृष्टया जिम्मेदारों की लापरवाही की ओर संकेत करती है और इसकी जांच आवश्यक है।
प्रधानाध्यापिका माया तिवारी की जिम्मेदारी पर सवाल
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका माया तिवारी विद्यालय संचालन की प्रमुख जिम्मेदार हैं। ऐसे में विद्यालय समय पर खुला या नहीं, शिक्षक समय से पहुंचे या नहीं और बच्चों को सुरक्षित रूप से विद्यालय परिसर में प्रवेश मिला या नहीं—इन सभी बिंदुओं पर प्रधानाध्यापिका की जवाबदेही तय होना स्वाभाविक है।
वहीं विद्यालय के अन्य स्टाफ रीतू प्रजापति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि विद्यालय के संचालन के दौरान बच्चे गेट के बाहर खड़े रहे, तो उस समय मौजूद स्टाफ की जिम्मेदारी क्या थी और बच्चों को परिसर के अंदर प्रवेश क्यों नहीं कराया गया—इसका जवाब शिक्षा विभाग को जांच के माध्यम से सामने लाना चाहिए।
बच्चों का भविष्य दांव पर, अभिभावकों के सपनों से जुड़ा मामला
गांव के अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में इस उम्मीद से भेजते हैं कि उन्हें नियमित पढ़ाई, शिक्षक का मार्गदर्शन और सुरक्षित वातावरण मिलेगा। छोटे-छोटे बच्चों का विद्यालय के बाहर इंतजार करना केवल एक प्रशासनिक लापरवाही का सवाल नहीं है, बल्कि उनके समय, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
हाइवे के किनारे विद्यालय होने के कारण स्थिति और संवेदनशील हो जाती है। विद्यालय परिसर के भीतर बच्चों की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करना विद्यालय प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अब शिक्षा विभाग की जांच जरूरी
कोटहा प्राथमिक विद्यालय की इस स्थिति को लेकर संबंधित शिक्षा अधिकारियों को मौके पर जांच कर विद्यालय खुलने का निर्धारित समय, शिक्षक उपस्थिति, उपस्थिति पंजिका, वास्तविक विद्यालय संचालन और बच्चों के बाहर खड़े रहने की वजह स्पष्ट करनी चाहिए।
साथ ही प्रधानाध्यापिका माया तिवारी, स्टाफ रीतू प्रजापति तथा अन्य संबंधित कर्मचारियों का पक्ष लेकर यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि घटना के समय विद्यालय में कौन मौजूद था और बच्चों को विद्यालय परिसर के बाहर क्यों रहना पड़ा।
सवाल सीधा है—जब बच्चे पढ़ने के लिए समय से विद्यालय पहुंच रहे हैं, तो क्या विद्यालय प्रशासन भी उतनी ही जिम्मेदारी से उनके स्वागत के लिए तैयार है?
कोटहा विद्यालय की तस्वीर अब प्रधानाध्यापिका, स्टाफ और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था—तीनों की जवाबदेही पर सवाल खड़ा कर रही है। आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े इस मामले को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।











