प्रयागराज महाकुंभ गंगा की लहरों पर चढ़ा आस्था का भगवा रंग, पांटून पुलों का बदला गया रूप
संवाददाता बिपिन मिश्रा कुंडा प्रतापगढ़
प्रयागराज धर्म और अध्यात्म की नगरी प्रयागराज में दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम यानी ‘महाकुंभ’ की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। लेकिन इस बार संगम के तट पर नजारा कुछ अलग और खास है। गंगा और यमुना की रेती पर बसने वाले तंबुओं के शहर से लेकर नदी पर बनने वाले रास्तों तक हर तरफ ‘भगवा’ रंग की छटा बिखरने लगी है।
पांटून पुलों का ‘भगवाकरण’
मेले में श्रद्धालुओं को नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक ले जाने के लिए बनाए जा रहे पीपे के पुल (पांटून ब्रिज) इस बार आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आमतौर पर लोहे के इन पीपों का रंग लाल, ग्रे या सिल्वर होता था, लेकिन इस बार प्रशासन ने इसे सनातन संस्कृति के प्रतीक भगवा रंग में रंगने का निर्णय लिया है।
आध्यात्मिक आभा और एकरूपता
दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो गंगा की लहरों पर भगवा चादर बिछी हो। जानकारों का कहना है कि यह बदलाव मेले को एक भव्य और आध्यात्मिक ‘थीम’ देने के लिए किया गया है। साधु-संतों के वेश और अखाड़ों की ध्वजाओं से मेल खाता यह रंग पूरे मेला क्षेत्र में एकरूपता ला रहा है।
तैयारियां अंतिम चरण में
प्रशासन के मुताबिक, पांटून पुलों का निर्माण और रंग-रोगन का काम अंतिम चरण में है। इस बार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलों की संख्या और चौड़ाई पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
लेकिन चर्चा का विषय सिर्फ और सिर्फ इनका नया ‘रंग-रूप’ है।












