“300 गौ वंश की मौत पर फूटा जनाक्रोश: नवागढ़ में निकली सत्ता की प्रतीकात्मक अर्थी, किसानों ने पूछा— आखिर जिम्मेदार कौन…?”
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा/नवागढ़। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र इन दिनों गौ वंश, किसानों की फसल सुरक्षा और राजनीतिक टकराव का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। झिरिया पंचायत में करीब 300 गौ वंश की मौत और छुट्टा मवेशियों से किसानों की बर्बाद होती फसलों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब उग्र राजनीतिक संघर्ष में बदलता दिखाई दे रहा है। बीडीसी दीपक सिंह दिनकर के नेतृत्व में जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने सत्ता पक्ष और विपक्ष को आमने-सामने ला खड़ा किया है। गौ वंश और किसानों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार, जिला प्रशासन और गौ आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा निकाली। इस दौरान पूरे क्षेत्र में नारेबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयानबाजी से माहौल गरमा गया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि गौ संरक्षण, गौठान और किसानों की सुरक्षा को लेकर सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों ने केवल वादे किए, लेकिन जमीन पर कोई स्थायी समाधान नहीं दिया गया। किसानों का कहना है कि छुट्टा मवेशियों ने उनकी मेहनत से तैयार फसलों को बर्बाद कर दिया, जबकि दूसरी ओर गौ वंश भूख-प्यास से सड़कों और गांवों में दम तोड़ रहे हैं।प्रदर्शन के दौरान मंच से तीखे राजनीतिक बयान भी दिए गए। एक वक्ता ने खुले मंच से कहा— “आज अर्थी निकली है… दस दिन बाद दसगात्र का न्योता भी तैयार रखिए…” इस बयान के बाद पूरे आंदोलन ने और अधिक राजनीतिक रंग पकड़ लिया। लोग यह चर्चा करते नजर आए कि आखिर यह बयान किसके लिए और क्यों दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने स्थानीय मंत्री दयाल दास बघेल पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता का अंतिम दौर चल रहा है और आगामी चुनाव में जनता जवाब देगी। मंच से कहा गया— “राम और गौ माता के नाम पर राजनीति कर सत्ता हासिल की गई, लेकिन आज ना गौ वंश सुरक्षित है और ना किसान…” प्रदर्शन में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा, पूर्व विधायक गुरु दयाल सिंह बंजारे, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रांजल तिवारी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। नेताओं ने आरोप लगाया कि जो भी गौ वंश और किसानों की आवाज उठाता है, उसके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कर दबाने की कोशिश की जाती है। प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नारेबाजी हुई। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। कांग्रेस कार्यकर्ता स्थानीय मंत्री, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, जिला प्रशासन और गौ आयोग अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगा रहे थे, वहीं भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विरोध में उतर आए। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर 300 गौ वंश की मौत का जिम्मेदार कौन है? किसानों की फसल सुरक्षा कब होगी? गौठान और गौ संरक्षण योजनाओं का लाभ आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा? क्या जनहित के मुद्दे अब केवल राजनीतिक हथियार बनकर रह गए हैं? ग्रामीणों और आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि किसानों और गौ वंश के अस्तित्व की लड़ाई है। वहीं सत्ता पक्ष पूरे आंदोलन को राजनीतिक ड्रामा बताकर विपक्ष पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा रहा है। नवागढ़ में उठी यह चिंगारी अब बड़ा जनआक्रोश बनती दिखाई दे रही है। जनता लगातार पूछ रही है—“गौ माता के नाम पर वोट मांगने वाले… आज गौ वंश की चीखों पर मौन क्यों हैं…?”












