छह महीने से वेतन नहीं मिला, एटा की जवाहर तापीय परियोजना में मजदूरों की हड़ताल तेज
भुखमरी, कर्ज और भ्रष्टाचार के आरोपों से गूंजा निर्माण स्थल, मजदूरों का अल्टीमेटम—”अब आश्वासन नहीं, भुगतान चाहिए”
संवादाता अमन अहमद एटा, उत्तर प्रदेश – मालवाल स्थित निर्माणाधीन जवाहर तापीय विद्युत परियोजना में चल रहे मजदूरों के आक्रोश ने सोमवार को हड़ताल का रूप ले लिया। मजदूरों का आरोप है कि पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके परिवारों का गुजर-बसर मुश्किल हो गया है। वेतन की मांग को लेकर अब सैकड़ों मजदूरों ने काम रोक दिया है और कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
आश्वासन बहुत मिले, अब चाहिए न्याय:
फिटर देशपाल सिंह ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है जब वेतन में देरी हुई हो। “हर बार झूठे आश्वासन मिलते हैं, लेकिन घर का चूल्हा बुझा हुआ है। हम अब चुप नहीं बैठेंगे।” वहीं श्रमिक अतुल दीक्षित ने कहा, “चार महीने से तनख्वाह नहीं मिली। हमारी कंपनी मेक मारवैल कहती है कि मुख्य ठेकेदार दूसान पैसे नहीं दे रहा। मगर हमारी गलती क्या है?”
फर्जी फिंगरप्रिंट और घोटाले के आरोप:
मजदूरों ने ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि फर्जी फिंगरप्रिंट के जरिये मजदूरों की हाजिरी लगाकर वेतन का गबन किया जा रहा है। यह कोई नया मामला नहीं है—इससे पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कर्ज में डूबे मजदूर, परिवार चलाना मुश्किल:
मजदूर सतेंद्र कुमार ने कहा कि वह दो कंपनियों में काम कर चुके हैं—जेपी टैब और एनएस—लेकिन दोनों ने मजदूरी नहीं दी। विकास नामक श्रमिक ने बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें कर्ज लेना पड़ा, अब हालत यह है कि रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो रहीं।
प्रशासन मौन, समाधान नदारद:
हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने बताया कि प्रशासन और पुलिस केवल ‘समझौता कराओ, काम कराओ’ की नीति पर चल रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। “सिर्फ काम करवाने में रुचि है, हमारी समस्याएं किसे दिखती हैं?” एक मजदूर ने सवाल उठाया।
मजदूरों की चेतावनी—अब या कभी नहीं:
हड़ताल पर डटे सैकड़ों श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनका पूरा बकाया वेतन नहीं दिया जाएगा, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। “अब एक इंच भी नहीं हिलेंगे, चाहे जितना दबाव आए,” उन्होंने कहा।
सरकार और संबंधित कंपनियों से मजदूरों की अपील है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए, वरना परियोजना का काम पूरी तरह ठप हो सकता है।
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