प्रतापगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल, मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी सुविधाओं का संकट
संवाददाता विनय कुमार मिश्रा प्रतापगढ़ में राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में वर्तमान समय में एक भी शव वाहन संचालित नहीं है। पहले उपलब्ध दो शव वाहन भी खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में अस्पताल में किसी मरीज की मृत्यु होने पर परिजनों को निजी एम्बुलेंस का सहारा लेकर शव घर ले जाना पड़ रहा है।
स्थिति केवल शव वाहन तक सीमित नहीं है। जिला अस्पताल के समय जहां छह ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) तैनात रहते थे, वहीं वर्तमान में एक भी ईएमओ उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है। इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
हाल ही में नवागत जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ सकी और कई महत्वपूर्ण कमियां अधिकारियों की नजरों से ओझल रहीं।
इस बीच प्रतापगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी तिलोई विधानसभा से विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह को सौंपी गई है। आमजन की अपेक्षा है कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार और प्रशासन गंभीरता से ध्यान देगा।
स्वास्थ्य विभाग की बदहाल व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। स्वास्थ्य सेवाएं सीधे जनता के जीवन से जुड़ी होती हैं, ऐसे में शव वाहन, चिकित्सकों और आपातकालीन सेवाओं जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
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