“सामाजिक न्याय एवं प्रतिनिधित्व सम्मेलन” पर प्रशासनिक रोक,लोकतांत्रिक अधिकारों का हुआ हनन।
संवाददाता करन कुमार विश्वकर्मा प्रतापगढ़। आपको बता दें कि जनपद प्रतापगढ़ में 28 सितम्बर 2025 को सामाजिक न्याय एवं प्रतिनिधित्व सम्मेलन पर रोक लगा दी गई थी इसके साथ ही आपको बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रनेता इंंजी. संदीप विश्वकर्मा ने बताया कि प्रतापगढ़ में आयोजित होने वाले “सामाजिक न्याय एवं प्रतिनिधित्व सम्मेलन” की लिखित अनुमति एसडीएम सदर, प्रतापगढ़ द्वारा 24 सितम्बर 2025 को प्रदान की गई थी।
सभी तैयारियाँ पूरी होने के बाद अचानक 27 सितम्बर की रात लगभग 8 बजे कोतवाली थाना से फोन पर सूचना दी गई कि कार्यक्रम की अनुमति निरस्त कर दी गई है। इसके अलावा इंजी. संदीप विश्वकर्मा ने जिलाधिकारी से भेंट कर कहा कि यह सम्मेलन किसी एक जाति का नहीं बल्कि कई अतिपिछड़ी जातियों—लोहार, सोनार, बढ़ई, ठठेरा एवं शिल्पकार—के सामाजिक न्याय एवं प्रतिनिधित्व से जुड़ा कार्यक्रम है।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के सातवें राष्ट्रपति स्व. ज्ञानी जैल सिंह के पौत्र श्री इंद्रजीत सिंह बब्बू जी पहले से ही पहुँच चुके थे तथा विश्वकर्मा समाज के भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी विशिष्ट अतिथि थे। किन्तु जिलाधिकारी ने यह कहते हुए अनुमति रद्द कर दी कि भाजपा कार्यालय लखनऊ से फोन आया है तथा आपके विरुद्ध एक प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ है।
इसी क्रम में जब संदीप विश्वकर्मा ने प्रेस वार्ता करने की अनुमति माँगी तो जिलाधिकारी महोदय ने धमकी भरे शब्दों में कहा— “यदि आप लोग तत्काल वापस नहीं गए तो इतने मुकदमे लगवा दूँगा कि जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।” हालांकि आयोजकगण जब कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे तो पुलिस प्रशासन ने गेट पर ताला लगाकर जबरन रोक लगा दी और लोगों पर दबाव बनाया कि वे स्थल खाली कर दें। इस दौरान इंंजी. संदीप विश्वकर्मा की पुलिस प्रशासन से झड़प भी हुई और इसके विरोध में विश्वकर्मा समाज के लोगों ने गेट पर ही कई घंटों तक धरना-प्रदर्शन किया। इसके साथ ही आपको बताते चलें कि
इंजी. संदीप विश्वकर्मा ने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। भाजपा विश्वकर्मा समाज को प्रजा बनाकर ही रखना चाहती है और भाजपा विश्वकर्मा समाज को हिंदू मानती ही नहीं है। यह घटना विश्वकर्मा समाज के साथ ऐतिहासिक अन्याय है जिसे समाज कभी नहीं भूलेगा। “समय आने पर हम लोग ब्याज समेत भाजपा को वापस जरूर करेंगे।” उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य किसी एक जाति का नहीं बल्कि भगवान विश्वकर्मा के वंशजों—लोहार, सोनार, बढ़ई, ठठेरा एवं शिल्पकार—आदि विभिन्न अतिपिछड़ी जातियों के हक और प्रतिनिधित्व की आवाज़ उठाना था, लेकिन भाजपा सरकार ने तानाशाही रवैये से जिस तरह से अपमान किया है, उसका बदला हम लोग 2027 में जरूर लेंगे।इंजी. संदीप विश्वकर्मा ने भाजपा से सवाल किया कि विश्वकर्मा समाज ने सदैव देश और समाज के विकास के लिए सतत सृजनात्मक कार्य किया, लेकिन भागीदारी नहीं मिली।
भाजपा सरकार 11 साल से केंद्र में और 8 साल से प्रदेश में सत्ता में है, इसके बावजूद आज तक विश्वकर्मा समाज को 11 विधायक भी नहीं मिले। क्यों? भाजपा सरकार विश्वकर्मा योजना के नाम पर केवल ठगने का काम कर रही है। क्या विश्वकर्मा समाज के हक-अधिकार को केवल हिंदू के नाम पर लूटा जाएगा?कई घंटे तक धरना-प्रदर्शन के बाद एसडीएम सदर पुलिस बल के साथ पहुँचीं। इस पर इंंजी. संदीप विश्वकर्मा ने विश्वकर्मा समाज के सम्मान के लिए ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि कार्यक्रम पर लगी रोक को तत्काल निरस्त किया जाए, प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव में लिए गए निर्णय की उच्चस्तरीय जाँच हो और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए समाज की आवाज़ को बुलंद करने का अवसर दिया जाए।
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