मुरादनगर की गंगनहर – मौतों के पीछे का रहस्य अभी बाकी है, लगातार मौतों से घिरी गंगनहर- जवाब तलाशता समाज
पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ़ ऑल एनसीआर
“हरमीत प्रकरण समेत कई घटनाओं ने उठाए पुराने सवाल — गायब आभूषण, बढ़ती मौतें और रहस्य की अनसुलझी परतें”
लेखक: रविंद्र आर्य उत्तर प्रदेश: गाजियाबाद। यह एक वास्तविक कहानी 2003 की घटना का स्वरुप है जहां गंग नहर छोटे हरिद्वार गर्मी बढ़ते ही दिल्ली से सटे गाजियाबाद के मुरादनगर स्थित गंगनहर क्षेत्र में एक बार फिर लगातार हो रही डूबने की घटनाओं और मौतों ने पूरे इलाके को चिंता और आशंकाओं के माहौल में ला खड़ा किया है। गर्मी बढ़ते ही बड़ी संख्या में लोग गंगनहर में स्नान और तैराकी के लिए पहुंचते हैं, लेकिन पिछले लगभग एक महीने में सामने आई मौतों की घटनाओं ने वर्षों पुराने उन सवालों को फिर जीवित कर दिया है, जिनका उत्तर आज तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सका। स्थानीय लोगों के अनुसार हाल के दिनों में लगभग 13 लोगों की मौतों ने पूरे क्षेत्र में भय का वातावरण पैदा कर दिया है। इन्हीं घटनाओं को लेकर गाजियाबाद के शहर विधायक संजीव शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल सामान्य हादसों का विषय नहीं रह गया है। लगातार बढ़ती घटनाओं ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर समस्या केवल लापरवाही, प्रशासनिक कमी और सुरक्षा इंतजामों की कमजोरी की है या इसके पीछे कोई और कारण भी हो सकता है जिसकी गंभीरता से जांच आवश्यक है।
पुराने मामलों ने बढ़ाया संदेह
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले भी गंगनहर में अचानक डूबने की घटनाएं तेजी से बढ़ गई थीं। उस समय भी कई महिला और पुरुष नहर में नहाने के दौरान डूब गए थे। कई मामलों में परिजनों ने आरोप लगाया था कि जब शव बरामद हुए तो उनके शरीर से सोने के आभूषण गायब थे। महिलाओं की चेन, कानों के कुंडल तथा पुरुषों की अंगूठियां और चेन तक बरामद नहीं हुई थीं।कुछ बच निकले लोगों ने उस समय यह भी दावा किया था कि नहाते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उनके पैर पकड़कर पानी के भीतर खींचने का प्रयास किया हो। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि कभी नहीं हो सकी, लेकिन लगातार सामने आती घटनाओं ने स्थानीय स्तर पर अनेक तरह की आशंकाओं को जन्म दिया। इसी कारण वर्षों से यह चर्चा समय-समय पर उठती रही है कि कहीं गंगनहर में सक्रिय कोई ऐसा गिरोह तो नहीं है जो लोगों को निशाना बनाकर लूटपाट करता हो। हालांकि इस संबंध में किसी भी जांच एजेंसी द्वारा अब तक कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
हिन्दू संगठनों ने लगाए गंभीर आरोप
अब कुछ हिन्दू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा महिला संगठन महाकाली वाहिनी की पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि मुरादनगर के छोटा हरिद्वार क्षेत्र में तथाकथित “तैराक जिहादी” या “जेहादी गिरोह” सक्रिय हो सकते हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि हाल के समय में हुई कई मौतें संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हैं और पूरे प्रकरण की गहन जांच आवश्यक है। इन संगठनों का कहना है कि लगभग एक महीने में हुई मौतों का आंकड़ा सामान्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से मांग की है कि सभी घटनाओं की एकीकृत जांच कर यह पता लगाया जाए कि कहीं इनके पीछे कोई संगठित आपराधिक नेटवर्क तो नहीं है।
2003 की घटना का भी हो रहा उल्लेख
इन आरोपों के संदर्भ में वर्ष 2003 की जलालाबाद गांव की एक घटना का भी उल्लेख किया जा रहा है। स्थानीय चर्चाओं में कहा जाता है कि उस समय गांव के लोगों द्वारा दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। आरोपों के अनुसार उन युवकों पर स्कूल जाने वाली नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़, अश्लील हरकतें करने और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। कुछ लोग वर्तमान घटनाओं और उस पुराने प्रकरण को जोड़कर देखते हैं। हालांकि इन दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि किसी सरकारी एजेंसी या न्यायालय द्वारा नहीं की गई है। इसके बावजूद क्षेत्र में अनेक लोग मानते हैं कि पूरे घटनाक्रम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को भी जांच के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। जिसे पूर्व बीजेपी मेयर आशु वर्मा ने जलालाबाद की जमीन पर इस घटनाक्रम को जाना था।
विधायकों ने भी उठाई जांच की मांग
इससे पहले लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर भी गंगनहर क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों के समक्ष नाराजगी व्यक्त करते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। उनकी मांग के बाद पुलिस और प्रशासन ने नहर किनारे निगरानी बढ़ाई, लोगों को प्रतिबंधित क्षेत्रों में स्नान करने से रोका तथा नियमित गश्त शुरू की। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस दौरान डूबने की घटनाओं में कुछ कमी भी देखने को मिली थी। लेकिन इस वर्ष भीषण गर्मी शुरू होते ही मौतों का आंकड़ा एक बार फिर बढ़ने लगा है। इसी को देखते हुए शहर विधायक संजीव शर्मा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले लगभग एक महीने में दस से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सुरक्षा प्रबंधों को और मजबूत करने की मांग की है।
हरमीत प्रकरण और उठते सवाल
प्रयागराज की विपिन नाटक कम्पनी तथा लोनी निवासी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आशीष संधू भी इस विषय को सार्वजनिक मंचों पर उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ मामलों में कई ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। हरमीत नामक युवक के मामले का उल्लेख करते हुए वे दावा करते हैं कि उसकी मृत्यु के बाद कुछ परिस्थितियां संदेह पैदा करती हैं और उनकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के आभूषण गायब पाए जाते हैं अथवा परिजनों को जांच प्रक्रिया पर संदेह है जिसमें मात्र 16 सेकंड में एक अच्छा खासे तैराकी का डूबने में तो ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि मुरादानगर की पुलिस एस आई का केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि लोग शराब पीकर नहर में आते हैं और डूब जाते हैं। उनका प्रश्न है कि क्या सभी पीड़ितों की परिस्थितियां एक जैसी थीं और क्या प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की गई। यह संदेस हम नाटक एवं वीडियो लेख द्वारा उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से अनुरोध करेंगे सभी तैराक जिहादीयो को गिरफ्तारी कर जांच की जाए।
सीबीआई, एनआईए और एटीएस जांच की मांग
कुछ संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि यदि स्थानीय स्तर पर संदेह और विवाद लगातार बने हुए हैं तो मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर एनआईए, एटीएस उत्तर प्रदेश अथवा सीबीआई जैसी एजेंसियों द्वारा तथ्यों की समीक्षा कराई जाए ताकि सभी आशंकाओं का निष्पक्ष समाधान हो सके। जिसमें छोटी गंगा के करीब रहे गांव के ओवर ग्राउंड वर्कर स्लीपर सेल रहा क्षेत्र मसूरी डासना एवं मुरादनगर पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर मोमिनो द्वारा पढ़ाए गए मदरसे छाप तैराकी जेहाद करके काफिरों को लूटकर मारने के आदेश पर उनका हुकुम मान रहे हो। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि अब तक प्रस्तुत किए गए अधिकांश दावे आरोपों और आशंकाओं के रूप में ही सामने आए हैं। इनकी पुष्टि किसी न्यायालय, जांच एजेंसी या आधिकारिक सरकारी रिपोर्ट द्वारा नहीं हुई है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष केवल सक्षम जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं। फिलहाल गंगनहर में बढ़ती मौतों ने एक बार फिर उस रहस्य, भय और अविश्वास को जीवित कर दिया है जो वर्षों से इस क्षेत्र के साथ जुड़ा रहा है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं कि क्या इस बार इन घटनाओं की ऐसी जांच होगी जो सभी सवालों के उत्तर दे सके।
हरमीत प्रकरण समेत सभी मामलों की स्वतंत्र जांच की उठी मांग
प्रताप विहार निवासी हरमीत के परिवार में अब कोई पुरुष सदस्य शेष नहीं बचा है। पिता के स्वर्गवास के बाद हरमीत ही परिवार का एकमात्र सहारा था। उसके निधन से मां, तीन बहनें और हाल ही में विवाहिता हुई उसकी पत्नी गहरे सदमे और असहज परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिजनों का आरोप है कि गले की चेन और अंगूठी जैसे मामूली लालच के लिए हरप्रीत को गंग नहर में डुबोकर मार दिया गया। उनका कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में कुछ स्थानीय शरारती तत्व हरप्रीत को पानी में घेरे हुए दिखाई देते हैं तथा घटना के बाद नहर किनारे भागते भी नजर आते हैं। परिवार का कहना है कि मात्र 16 सेकंड में एक अच्छे तैराक का डूब जाना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। हरमीत की बहन के अनुसार परिवार की मानसिक स्थिति ऐसी है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे क्या करें और किससे न्याय की गुहार लगाएं। उनका कहना है कि हरमीत अब वापस नहीं आ सकता, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। परिवार का आरोप है कि मामला मीडिया में व्यापक रूप से सामने आने के बावजूद जांच में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। इसी विषय को सार्वजनिक मंच पर लाने और पीड़ित परिवार की आवाज़ को प्रमुखता से उठाने की जिम्मेदारी विपिन सिंह और उनकी नाटक कम्पनी ने ली है। “महाकाली वाहिनी से जुड़ी उदिता त्यागी ने भी घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि हाल में हुई मौतों की परिस्थितियों की गहन जांच होनी चाहिए।” “लोनी निवासी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आशीष संधू ने भी मामले को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।” “प्रयागराज की विपिन नाटक कम्पनी से जुड़े विपिन सिंह ने कहा कि यदि स्थानीय लोगों के मन में संदेह हैं तो सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।”
इसी प्रकार गाज़ियाबाद विधायक संजीव शर्मा, लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर, उदिता त्यागी, आशीष संधू, विपिन सिंह, तथा पीड़ित हरमीत का उल्लेख किया है।












