आखिर कब खत्म होगी जीव हिंसा? – मानवता के सामने सबसे बड़ा सवाल
आज के युग में जब विज्ञान, शिक्षा और तकनीक नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, तब भी जीव हिंसा जैसे अमानवीय कृत्य रुकने का नाम नहीं ले रहे। जानवरों पर अत्याचार, वध, और उनके साथ होने वाली क्रूरता हमारे समाज के संवेदनहीन होते जाने का प्रमाण है। सवाल यह है कि आखिर कब खत्म होगी जीव हिंसा?
हर साल लाखों पशु भोजन, वस्त्र, और मनोरंजन के नाम पर मारे जाते हैं। सड़क किनारे या घरों में भी जानवरों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ आम हो चुकी हैं। जबकि धर्म, संस्कृति और नैतिकता सभी जीवों के प्रति करुणा और दया सिखाती हैं। महात्मा गांधी ने कहा था, “किसी देश की महानता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां के लोग पशुओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।”
सरकार और सामाजिक संगठनों द्वारा पशु संरक्षण के लिए कई कानून और अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन तब तक बदलाव संभव नहीं जब तक हर नागरिक अपने अंदर करुणा और संवेदना का भाव नहीं जगाएगा। भोजन की थाली से लेकर फैशन तक, हर जगह हमें सोचना होगा कि क्या हम किसी जीव की पीड़ा के भागीदार तो नहीं बन रहे?
जीव हिंसा को रोकने के लिए आवश्यक है कि स्कूलों में बच्चों को पशु प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा दी जाए। समाज को यह समझना होगा कि पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि हर जीव की है।
यदि हम सच में एक सभ्य और संवेदनशील समाज बनना चाहते हैं, तो हमें यह संकल्प लेना होगा कि जीव हिंसा को जड़ से समाप्त करेंगे। तभी धरती पर सच्ची शांति और करुणा का युग आएगा।
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