“कभी ‘बड़का जिला’ कहलाने वाला प्रतापगढ़ आज गरीबी की सूची में, आखिर जिम्मेदार कौन
संवाददाता विनय कुमार मिश्रा
प्रतापगढ़।प्रतापगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता आनंद पांडेय ने जिले की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 की रिपोर्टों में प्रतापगढ़ का नाम उत्तर प्रदेश के सबसे गरीब जिलों में शामिल होना बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक है।उन्होंने कहा कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए आत्ममंथन का विषय है। आजादी के बाद से अब तक जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछा जाना चाहिए कि आखिर विकास के बड़े दावों के बावजूद प्रतापगढ़ पिछड़ेपन और गरीबी की श्रेणी में क्यों पहुंच गया।
आनंद पांडेय ने कहा कि यदि जिले के विकास, युवाओं के रोजगार, किसानों की समृद्धि और जनता के सम्मान की बात करना राजनीति है, तो वे ऐसी राजनीति जीवनभर करते रहेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रतापगढ़ में बड़े उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसर क्यों नहीं विकसित हो पाए, जिसके कारण युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।उन्होंने जिले में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने, कृषि आधारित उद्योग स्थापित करने, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने तथा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और जिले की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।अंत में उन्होंने जिले के बुद्धिजीवियों, युवाओं, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रतापगढ़ के विकास के लिए एकजुट होने का आह्वान करते हुए संकल्प लेने की अपील की ।हम प्रतापगढ़ को गरीबी की पहचान नहीं, बल्कि विकास की मिसाल बनाएंगे।
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