“न्याय या वसूली? अलीगंज SDM कोर्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप, वकीलों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार”

“न्याय या वसूली? अलीगंज SDM कोर्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप, वकीलों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार”

कोर्ट मुहर्रिर सिपाही पर गंभीर आरोप; बार एसोसिएशन का कड़ा फैसला, न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल

मंडल संवाददाता अमित चौहान

जनपद एटा की अलीगंज तहसील से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अलीगंज SDM न्यायालय में कार्यप्रणाली को लेकर वकीलों ने खुलकर विरोध जताया है और कोर्ट का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू कर दिया है। बार एसोसिएशन अलीगंज की आपात बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया, जिसमें कोर्ट मुहर्रिर सिपाही सचिन चौधरी और न्यायालय की कार्यशैली पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और न्यायिक प्रक्रियाओं की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

गंभीर आरोपों से हिला न्याय तंत्र

वकीलों के अनुसार, न्यायालय में कई अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—बिना प्रार्थना पत्र, बंधनामा और हलफनामा के जमानत मंजूर करना पैसों के बदले मुल्जिमों को राहत देना मुकदमों में बिना सुनवाई आदेश पारित करना या जानबूझकर लंबित रखना धारा 80 व 116 राजस्व संहिता के मामलों में कथित अवैध वसूली पैमाइश और धारा 32/38 के मामलों में धन लेकर फैसले करना इन आरोपों ने न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुहर्रिर की भूमिका पर उठे सवाल

वकीलों ने विशेष रूप से कोर्ट मुहर्रिर सिपाही सचिन चौधरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं, जो पिछले चार वर्षों से इसी न्यायालय में तैनात हैं। आरोप है कि न्यायिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका संदिग्ध रही है और कई मामलों में अनियमितताएं उनके स्तर से संचालित हो रही थीं।

“अब नहीं सहेंगे” — वकीलों का ऐलान

बार एसोसिएशन ने साफ शब्दों में कहा है कि जब न्याय व्यवस्था ही संदेह के घेरे में आ जाए, तो विरोध करना जरूरी हो जाता है। वकीलों का कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके पेशे की नहीं, बल्कि आम जनता के न्याय के अधिकार की है।

प्रशासन की चुप्पी बनी रहस्य

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि— क्या प्रशासन इन मामलों से अनजान है? या जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?

जनता में भी आक्रोश

अलीगंज विधानसभा क्षेत्र के वादकारियों और आम जनता में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह न्याय व्यवस्था के साथ सीधा विश्वासघात है।

अब आगे क्या?

अलीगंज का यह मामला केवल एक न्यायालय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक और न्यायिक सिस्टम की साख पर सवाल खड़ा कर रहा है। वकीलों का बहिष्कार एक चेतावनी है—यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो विरोध और तेज हो सकता है।अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है—सच्चाई सामने आएगी या मामला दबा दिया जाएगा।

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