विधानसभा सत्र से पहले शिक्षामित्रों की दस्तक, बोले—अब वादे नहीं, समाधान चाहिए
संवाददाता योगेंद्र सिंह एटा। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ, जनपद एटा के पदाधिकारियों ने शनिवार को विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड को छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर शिक्षामित्रों की वर्षों पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग उठाई। संघ ने कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को शिक्षामित्रों के हित में ठोस निर्णय लेना चाहिए।
संघ के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक को बताया कि प्रदेश के लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्र पिछले 26 वर्षों से बेसिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद आज भी उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है और लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान नहीं हो सका है।
ज्ञापन में विभागीय टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्रों को शामिल करने, टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों का शिक्षक पद पर समायोजन, वर्ष 2017 के आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों की वापसी, समायोजन होने तक 12 माह का नियमित मानदेय एवं 62 वर्ष की आयु तक सेवा, शिक्षकों की भांति कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा मूल विद्यालय वापसी के आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
संघ पदाधिकारियों ने विधायक से आग्रह किया कि विधानसभा सत्र के दौरान इन मांगों को मुख्यमंत्री और सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाए, ताकि वर्षों से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सके और शिक्षामित्रों को न्याय मिल सके।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष मनोज यादव, वरिष्ठ नेता राजेश कुमार गुप्ता, महामंत्री हरिओम प्रजापति, कोषाध्यक्ष सुनील चौहान सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र एवं संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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