भगवान परशुराम पर टिप्पणी को लेकर मोहन भागवत पर भड़के बीके शर्मा हनुमान
संवाददाता पवन सूर्यवंशी. गाजियाबाद: विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बीके शर्मा हनुमान ने मोहन भागवत द्वारा भगवान परशुराम पर टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया भगवान परशुराम हिंदू पौराणिक कथाओं में एक महत्वपूर्ण हस्ती हैं, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वह एक ब्राह्मण ऋषि के रूप में जन्मे थे, लेकिन उनमें क्षत्रिय योद्धा के गुण थे, जिन्होंने धर्म की रक्षा और अत्याचारी राजाओं को दंडित करने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। सभी धर्म, सभी जात के लोगों को अपने आप पर गोर्बान्वित महसूस करना चाहिए, चाहे वो राजपूत हो, ब्राह्मण हो, कायस्थ हो, बढ़ई समाज के लोग हो, सबको गर्व होना चाहिए खुद की जाती पे धर्म पे। सवाल ये है कि, मोहन भागवत जैसे पढ़े लिखे लोग इस प्रकार के अमर्यादित असाक्षर टिप्पणी भगवान परशुराम पर करना उनकी काबियिलात चेहरे जो समाज के बीच है।
यहां प्रश्ननचिन खड़ा करती है चुकी मोहन भागवत ने परशुराम जी को बढ़ई समाज का लकड़हारा बताया है, और सबसे बड़ी बात तो उन्होंने ये कही है कि वे कोई ब्राह्मण पुत्र नहीं थे। जबकि हिंदुओं के कई ग्रंथों में परशुराम जी का वर्णन है, और उसमें ये साफ कहा गया है कि उनके पिता ऋषि जगदमिनी (ब्राह्मण) के पुत्र थे, और उनकी मां राजकुमारी रेणुका (क्षत्रिय) के रूप में वर्णित की गईं हैं। तो इस प्रकार के टिक्का टिप्पणी के लिए उन्हें सर्वसमाज से एक बार माफी जरूर मांगनी चाहिए, और अपनी वाणी को वापस लेनी चाहिए
बीके शर्मा हनुमान ने भगवान परशुराम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान परशुराम भृगुवंशी हैं। एक मान्यता अनुसार महर्षि भृगु का जन्म जिस समय हुआ, उस समय इनके पिता प्रचेता ब्रह्मा सुषानगर, जिसे बाद में पर्शिया कहा जाने लगा, भू-भाग के राजा थे। ब्रह्मा पद पर आसीन प्रचेता की दो 2 पत्नियां थी। पहली भृगु की माता वीरणी व दूसरी उरपुर की उर्वषी जिनके पुत्र वशिष्ठजी हुए। भृगु मुनि की दूसरी पत्नी दानवराज पुलोम की पुत्री पौलमी की तीन संतानें हुई। दो पुत्र च्यवन और ऋचीक तथा एक पुत्री हुई जिसका नाम रेणुका था च्यवन ऋषि का विवाह गुजरात के खम्भात की खाड़ी के राजा शर्याति की पुत्री सुकन्या के साथ हुआ। ऋचीक का विवाह महर्षि भृगु ने गाधिपुरी (गाजीपुर) के राजा गाधि की पुत्री सत्यवती के साथ किया।
पुत्री रेणुका का विवाह भृगु मुनि ने उस समय विष्णु पद पर आसीन विवस्वान (सूर्य) के साथ किया, जो वैवस्वत मनु के पिता थे महर्षि भृगु के प्रपौत्र, वैदिक ॠषि ॠचीक के पौत्र, जमदग्नि के पुत्र, महाभारतकाल के वीर योद्धाओं भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा देने वाले गुरु, शस्त्र एवं शास्त्र के धनी ॠषि परशुराम का जीवन संघर्ष और विवादों से भरा रहा है। परशुराम योग, वेद और नीति में पारंगत थे। ब्रह्मास्त्र समेत विभिन्न दिव्यास्त्रों के संचालन में भी वे पारंगत थे। उन्होंने महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की। कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें कल्प के अंत तक तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया। इनके पिता का नाम जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था। ऋचीक-सत्यवती के पुत्र जमदग्नि, जमदग्नि-रेणुका के पुत्र परशुराम थे।
ऋचीक की पत्नी सत्यवती राजा गाधि (प्रसेनजित) की पुत्री और विश्वमित्र (ऋषि विश्वामित्र) की बहिन थी। परशुराम को शास्त्रों की शिक्षा दादा ऋचीक, पिता जमदग्नि तथा शस्त्र चलाने की शिक्षा अपने पिता के मामा राजर्षि विश्वमित्र और भगवान शंकर से प्राप्त हुई। देश के राजनीतिक दल ब्राह्मणों के योगदान को देश की जनता से लगातार झूठ बोल कर केवल उन्हें अपमानित करने का कार्य करते रहे, ब्राह्मणों के बारे में सिर्फ जातिवाद छुआछूत जैसे विचारों को लोगों के बीच परोसते गए।आज सब जगह जो ब्राह्मण अपमानित होता हैं उसमें सत्ताधारी दलों द्वारा का महत्वपूर्ण योगदान है उनके द्वारा यहां तक कि बच्चों को पढ़ाने की पुस्तकों में भी सिर्फ ब्राह्मणों की अच्छाइयों को छिपाकर नकारात्मता समाज के सामने परोसा जाने लगा।
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