टहरौली में मक्का पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित: एथेनॉल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को मिला तकनीकी मार्गदर्शन
संवाददाता अनिल कुशवाहा टहरौली (झांसी): इक्रीसेट, हैदराबाद द्वारा संचालित परियोजना के अंतर्गत शुक्रवार को टहरौली तहसील में मक्का की खेती, इसके लाभ और एथेनॉल उत्पादन की संभावनाओं पर आधारित एक दिवसीय जागरूकता एवं सह-इनपुट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR), लुधियाना के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम में टहरौली क्षेत्र के अनेक गांवों के प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। स्थानीय किसान उत्पादक संगठन (FPO) के पुष्पेंद्र सिंह एवं रामप्रकाश पटेल तथा प्राकृतिक संसाधन संरक्षण समिति, टहरौली के अध्यक्ष आशीष उपाध्याय ने क्षेत्रीय कृषि चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की भूमिका तय की।
ICAR-IIMR के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रभारी डॉ. शंकर लाल जाट ने बताया कि भारत सरकार एथेनॉल उद्योगों के जलग्रहण क्षेत्रों में मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष परियोजना चला रही है, जो देश के 15 राज्यों में क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत चयनित किसानों को उन्नत मक्का बीज, शाकनाशी एवं कीटनाशक नि:शुल्क वितरित किए जा रहे हैं।
डॉ. जाट ने किसानों को मक्का की वैज्ञानिक खेती, सिंचाई प्रबंधन, यंत्रीकरण, और बाजार से जुड़ाव के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि चित्रकूट जिले में स्थित एथेनॉल उद्योग किसानों से सीधा मक्का क्रय करेगा, जिससे उन्हें लाभकारी मूल्य प्राप्त होंगे और आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कार्यक्रम के दौरान IIMR और ICRISAT के संयुक्त प्रयास से 50 चयनित किसानों को शाकनाशी एवं कीटनाशकों के किट प्रदान किए गए।
ICRISAT की ओर से डॉ. अशोक शुक्ला ने मक्का फसल में लगने वाली प्रमुख बीमारियों की पहचान एवं प्रबंधन पर जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने किसानों को फसल चक्रण (crop rotation) के महत्व के बारे में बताया और यह भी स्पष्ट किया कि किस प्रकार मक्का की फसल इस क्षेत्र में मूंगफली का एक उपयुक्त एवं लाभकारी विकल्प बन सकती है।
यह पहली बार था जब टहरौली क्षेत्र में किसानों ने संगठित रूप से मक्का की बुवाई की दिशा में कदम बढ़ाया। इससे पूर्व, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से IIMR द्वारा इस क्षेत्र में पायलट स्तर पर सफल प्रयास किए जा चुके हैं।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मक्का की वैज्ञानिक खेती को अपनाने की उत्सुकता जताई और आशा व्यक्त की कि इससे उन्हें अतिरिक्त आय, टिकाऊ खेती और हरित ईंधन (एथेनॉल) के लिए कच्चे माल की आपूर्ति का नया अवसर प्राप्त होगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में ICRISAT टीम के विजय सिंह, दीपक त्रिपाठी, ललित किशोर, आनंद सिंह, सतेंद्र राणा, विवेक पटेल, जितेंद्र पूनिया, राकेश कुमार, भरत गुर्जर, रहीश, नीरज, शैलेन्द्र सोनी एवं प्रेमनारायण की सक्रिय भागीदारी सराहनीय रही।
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