स्वास्थ्य विभाग की जांच — होगी निष्पक्षता से या चढ़ेगी स्क्रिप्ट की भेंट?

स्वास्थ्य विभाग की जांच — होगी निष्पक्षता से या चढ़ेगी स्क्रिप्ट की भेंट?

संवाददाता — योगेंद्र सिंह

कुछ दिन पूर्व जनपद एटा के मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) कार्यालय में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीपक पांडे और स्टेनो मुकेश कुमार का एक स्टिंग ऑपरेशन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में दोनों अधिकारी अवैध पैथोलॉजी खोलने की “पूरी प्रक्रिया” बताते नज़र आ रहे हैं — स्थान से लेकर दलाल तक की व्यवस्था समझाते हुए। यह दृश्य विभाग की ईमानदारी पर गहरी चोट करता है। वीडियो के वायरल होने के बाद नवागत मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने तुरंत संज्ञान लेते हुए दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन के बाद अब जांच की जिम्मेदारी भी विभागीय अधिकारियों को ही सौंप दी गई है। यानी वही तंत्र, जिस पर सवाल उठे हैं, वही अब जांच करेगा। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि — क्या जांच निष्पक्ष होगी या “स्क्रिप्ट” पहले से तैयार है? सूत्र बताते हैं कि दोनों कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर विभाग में पहले से ही चर्चा थी। वायरल वीडियो में दोनों बेहद आत्मविश्वास के साथ अवैध पैथोलॉजी खोलने का तरीका बताते दिख रहे हैं —
वे यह तक बताते हैं कि कहाँ संपर्क करना है, कौन व्यक्ति सारी “व्यवस्थाएँ” कराएगा, और कितना खर्च आएगा।
वीडियो से साफ झलकता है कि एक पूरी चेन सिस्टम अवैध पैथोलॉजी संचालन में सक्रिय है।
सूत्रों के अनुसार विभाग में ही एक सपोर्टिंग लॉबी सक्रिय है, जो इन दोनों निलंबित कर्मचारियों को बचाने में जुटी है।
संभावना जताई जा रही है कि जांच रिपोर्ट “तकनीकी खामियों” का हवाला देकर इनके पक्ष में तैयार की जा सकती है, जिससे कार्रवाई केवल नाम मात्र की रह जाएगी।
हालाँकि वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह स्पष्ट प्रमाण के रूप में किसी भी प्रशासनिक जांच में पर्याप्त होना चाहिए। यदि इसके बावजूद कार्रवाई दब जाती है, तो यह विभाग की साख पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

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