RTI आवेदन पर सुनवाई बनी मजाक! स्पीड पोस्ट से भेजे आवेदन को बताया ‘गायब’, जनपद पंचायत साजा में प्रथम अपील खारिज”
12 बजे बुलाकर ढाई घंटे इंतजार, फिर कहा — ‘आवेदन मिला ही नहीं’
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत साजा अंतर्गत ग्राम पंचायत तिरियाभाठ में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आवेदक द्वारा 30/03/2026 को जन सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत तिरियाभाठ को स्पीड पोस्ट के माध्यम से सूचना आवेदन भेजा गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
सूचना नहीं मिलने पर आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं जनपद पंचायत साजा सीईओ सोमनाथ साहू के कार्यालय में प्रथम अपील प्रस्तुत की। इसके बाद सुनवाई हेतु 25/05/2026 को दोपहर 12:00 बजे उपस्थित होने का पत्र जारी किया गया।
समय पर पहुंचा आवेदक, लेकिन सुनवाई शुरू हुई 2:30 बजे
आवेदक निर्धारित समय पर 12:00 बजे कार्यालय पहुंच गया, लेकिन सुनवाई करीब ढाई घंटे बाद 2:30 बजे शुरू हुई। इस दौरान आवेदक घंटों कार्यालय में इंतजार करता रहा। मामले को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सचिव बोले — “आज दिनांक तक आवेदन नहीं मिला”
सुनवाई के दौरान जन सूचना अधिकारी एवं ग्राम पंचायत तिरियाभाठ सचिव ने दावा किया कि उन्हें आज दिनांक तक कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं आवेदक का कहना था कि आवेदन 30/03/2026 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा गया था और डाक रिकॉर्ड इसकी पुष्टि कर सकता है।
प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी सचिव की बात मानी, अपील खारिज
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं सीईओ जनपद पंचायत साजा सोमनाथ साहू ने भी यह कहते हुए अपील खारिज कर दी कि “जन सूचना अधिकारी को आज दिनांक तक आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।”
इस फैसले के बाद RTI कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि स्पीड पोस्ट से आवेदन भेजा गया था, तो उसकी जांच और डाक रिकॉर्ड का परीक्षण किए बिना अपील खारिज करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
“स्पीड पोस्ट से भेजा आवेदन गायब, फिर अपील भी खारिज — आखिर सूचना से इतना डर क्यों?”
पत्रकार ने मांगी बाइट, सीईओ बोले — “मैं कोई बाइट-व्हाइट नहीं दूंगा”
मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार द्वारा जनपद पंचायत साजा सीईओ सोमनाथ साहू से आधिकारिक प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा — “मैं कोई बाइट-व्हाइट नहीं दूंगा।”
सीईओ के इस बयान के बाद पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता पर और अधिक सवाल उठने लगे हैं
अब राज्य सूचना आयोग जाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार आवेदक अब इस मामले को राज्य सूचना आयोग तक ले जाने की तैयारी कर रहा है। वहीं क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर सूचना मांगने पर आवेदन “गायब” कैसे हो जाते हैं और बिना जांच के अपीलें कैसे खारिज की जा रही हैं।
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