ज़िंदा को मृत दिखाकर ज़मीन की बंदरबांट

ज़िंदा को मृत दिखाकर ज़मीन की बंदरबांट मैनपुरी में प्रशासनिक भ्रष्टाचार का हैरान कर देने वाला मामला

स्टेट संवाददाता विष्णु रावत. उत्तर प्रदेश के मैनपुरी ज़िले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और भूमि लेखा प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। किशनी तहसील क्षेत्र के ग्राम रठेरा, मौजा सिंघपुर निवासी लाखन सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें जीवित होने के बावजूद मृत घोषित कर दिया गया, और उनकी पुश्तैनी ज़मीन किसी और के नाम विरासत में दर्ज कर दी गई।

पीड़ित ने प्रशासनिक अधिकारियों को दी शिकायत

लाखन सिंह, पुत्र स्वर्गीय रामनाथ, ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि कुछ भ्रष्ट लेखपालों और अन्य लोगों की मिलीभगत से उन्हें कागज़ों में मृत दर्शाया गया और उनकी ज़मीन पर फर्जी तरीके से शिवदयाल पुत्र नत्थूलाल के नाम विरासत चढ़ा दी गई।

फोटो और दस्तावेज़ों से की गई धोखाधड़ी

लाखन सिंह का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े में उनकी फोटो का भी गलत इस्तेमाल किया गया और कूटरचित दस्तावेज़ तैयार किए गए। न तो किसी पंचायत में इस विषय पर चर्चा हुई, न ही किसी अधिकारी ने मौके पर जांच की। सीधे-सीधे ज़मीन हड़पने की साजिश रची गई, जिसमें कथित रूप से लेखपाल संदीप यादव की अहम भूमिका रही।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही

इस पूरे मामले की शिकायत 20 मार्च 2024 को एसडीएम किशनी को दी गई थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। लाखन सिंह ने बताया कि वह लगातार तहसील और अन्य प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।

पीड़ित की मांगें

1. मृतक घोषित कर की गई फर्जी विरासत को तुरंत निरस्त किया जाए।

2. दोषी लेखपाल संदीप यादव और अन्य शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

3. पीड़ित को उसकी पुश्तैनी भूमि पर पुनः स्वामित्व प्रदान किया जाए।

प्रशासनिक लापरवाही या सुनियोजित भ्रष्टाचार?

यह मामला केवल एक व्यक्ति की ज़मीन हड़पने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है जहाँ ज़िंदा व्यक्ति को मृत दिखाकर उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा किया जा रहा है। यह गरीब और असहाय लोगों के साथ हो रहे अन्याय का स्पष्ट उदाहरण है।

जनता का सवाल, प्रशासन का जवाब अभी बाकी

क्या अब किसी ज़िंदा व्यक्ति को भी कागज़ों में मृत दिखाकर उसकी ज़मीन हथियाना इतना आसान हो गया है?

क्या प्रशासन ऐसे मामलों में आंख मूंदे रहेगा?

जनता जानना चाहती है — दोषी कौन है और कार्रवाई कब होगी?

यह मामला केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर सवाल है।

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