नवरात्रि 2025 : पहला दिन और कलश स्थापना विधि

शारदीय नवरात्रि 2025 : पहला दिन और कलश स्थापना विधि

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 22 सितंबर 2025, सोमवार से प्रारंभ हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन कलश स्थापना (घट स्थापना) का विशेष महत्व होता है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

  • प्रातःकाल मुहूर्त : सुबह 6:05 से 7:45 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:55 से 12:45 बजे तक

(ध्यान दें कि स्थानानुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।)

पूजा सामग्री

  • स्वच्छ मिट्टी का कलश
  • जल, आम के पत्ते व नारियल
  • रोली, अक्षत, मौली
  • दूर्वा, सुपारी, पंचमेवा
  • लाल वस्त्र, फूल-माला
  • मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र

पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल को पवित्र कर वहां लाल कपड़ा बिछाएँ।
  3. मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उसके ऊपर जल से भरा कलश रखें।
  4. कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें।
  5. मां दुर्गा का आह्वान करते हुए दीप प्रज्वलित करें।
  6. शैलपुत्री देवी का ध्यान कर उन्हें पुष्प, फल, नैवेद्य अर्पित करें।
  7. दुर्गा सप्तशती, देवी कवच अथवा सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करें।
  8. अंत में आरती कर परिवार के मंगल और कल्याण की कामना करें।

शैलपुत्री माता की स्तुति

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा निम्न मंत्रों से करनी चाहिए—

ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

प्रार्थना मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

बीज मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

इन मंत्रों के साथ विधिपूर्वक पूजा करने से मां शैलपुत्री की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती है।

ये भी पढ़ें जिला कारागार का उच्च अधिकारियों द्वारा, किया गया निरीक्षण

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें