संभव 6.0 अभियान: दनकौर में सुपोषण के लिए सघन मॉनिटरिंग और मैदानी स्तर पर गतिविधियां तेज
संवाददाता सायरा सूर्यवंशी एनसीआर नोएडा
“गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा” की संकल्पना के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मुख्य सेविकाओं को दिए गए सख्त निर्देश।गौतमबुद्धनगर, 31 जुलाई 2026 बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित विशेष अभियान ‘संभव 6.0’ के अंतर्गत दनकौर परियोजना में कुपोषण उन्मूलन के लिए व्यापक स्तर पर कार्ययोजना लागू कर दी गई है। इस चरण का मुख्य ध्येय “गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा” प्रदान करना है, जिसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर घर-घर तक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय द्वारा मैदानी टीम की भूमिका, दैनिक कार्यों और मॉनिटरिंग प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।अभियान के तहत क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां मैदानी स्तर पर मुख्य भूमिका निभा रही हैं। उन्हें केंद्रों पर 0 से 5 वर्ष तक के सभी पंजीकृत बच्चों का वजन एवं लंबाई/ऊंचाई मापकर उनकी पोषण स्थिति (सामान्य, मध्यम कुपोषित-MAM एवं अति कुपोषित-SAM) का पारदर्शी विवरण दर्ज करने, चिन्हांकित अति कुपोषित (SAM) एवं मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों तथा जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के घर जाकर व्यक्तिगत परामर्श देने, माताओं को शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान, 6 माह तक केवल स्तनपान, 6 माह के बाद पौष्टिक ऊपरी आहार एवं स्वच्छता (हैंडवॉश) के प्रति जागरूक करने, विभागीय टेक होम राशन (THR) एवं पोषण पोटली का पात्र गर्भवती/धात्री महिलाओं तथा बच्चों तक पारदर्शी ढंग से वितरण सुनिश्चित करने तथा जटिल स्वास्थ्य समस्याओं या गंभीर कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य विभाग की सहायता से पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजने के निर्देश दिए गए हैं।अभियान में आंकड़ों की सटीकता एवं मैदानी कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मुख्य सेविकाओं (सुपरवाइजर्स) को विशेष मॉनिटरिंग के अधिकार एवं दायित्व दिए गए हैं। मुख्य सेविकाएं अपने-अपने सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि वजन मशीन एवं लेंथ बोर्ड का सही उपयोग हो रहा है। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे गृह भ्रमण एवं पोषण परामर्श का स्वयं मौके पर जाकर सत्यापन (क्रॉस-चेक) किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त रिपोर्ट एवं पोषण ट्रैकर ऐप पर दर्ज आंकड़ों का मिलान कर शत-प्रतिशत सटीक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके अतिरिक्त सेक्टर स्तर पर एएनएम एवं आशा बहुओं के साथ नियमित बैठकें कर कुपोषित बच्चों के टीकाकरण एवं चिकित्सा स्थिति पर भी निरंतर नजर रखी जा रही है। परियोजना स्तर पर पूरे अभियान की निगरानी के लिए सुदृढ़ समीक्षा व्यवस्था लागू की गई है। मुख्य सेविकाओं द्वारा प्रतिदिन अपने-अपने सेक्टर की रिपोर्ट संकलित की जा रही है तथा साप्ताहिक स्तर पर अभियान की प्रगति की समीक्षा की जा रही है। साथ ही किसी भी केंद्र पर फर्जी आंकड़े दर्ज करने, बच्चों का वजन न मापने अथवा गृह भ्रमण में किसी प्रकार की कोताही बरतने पर संबंधित कर्मी की जवाबदेही तय की जाएगी। यह जानकारी बाल विकास परियोजना अधिकारी दनकौर संध्या सोनी द्वारा दी गई। गौतमबुद्धनगर।












