मानवीय संवेदना और सामाजिक जागरूकता की मिसाल बने समाजसेवी मानवेन्द्र सिंह चौहान ‘मनु’
संवाददाता योगेन्द्र सिंह
एटा। समाजसेवी मानवेन्द्र सिंह चौहान ‘मनु’ ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सेवा, संवेदना और सामाजिक दायित्व उनके जीवन के मूल सिद्धांत हैं। एक फोन कॉल पर मिली सूचना के आधार पर वे तत्काल जैथरा कस्बा क्षेत्र के एक गांव पहुंचे, जहां एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई। गांव में रहने वाले एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट चुका था। लगभग सात माह पूर्व एच0आई0बी0 संक्रमण के कारण पिता का निधन हो गया था, वहीं बीते दिन इलाज के दौरान मां की भी इसी बीमारी से मृत्यु हो गई। माता-पिता दोनों को खो चुके दो मासूम बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए। मां के निधन के पश्चात जब बच्चों को मोर्चरी लाया गया, तो कड़ाके की ठंड में ठिठुरते, बेसहारा बच्चों को देखकर समाजसेवी ‘मनु’ भावुक हो उठे। उन्होंने बिना विलंब किए मानवीय पहल करते हुए बच्चों को गर्म कपड़े, कंबल एवं अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। साथ ही बच्चों को ढांढस बंधाते हुए उनके जीवन भर साथ खड़े रहने, संरक्षण देने और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। इसके पश्चात समाजसेवी मानवेन्द्र सिंह चौहान ‘मनु’ दिवंगत महिला के निज निवास पहुंचे, जहां उन्होंने अंतिम संस्कार की समस्त व्यवस्थाओं में सहयोग किया। आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराते हुए उन्होंने पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया। इस दौरान उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इन बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, भरण-पोषण एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर सहायता करते रहेंगे, ताकि अभाव और असहायता उनके जीवन की राह में बाधा न बने। इस अवसर पर समाजसेवी ‘मनु’ ने कहा कि एच0आई0बी0 जैसी गंभीर एवं संवेदनशील बीमारी को लेकर समाज में आज भी जागरूकता का अभाव है, जिसके कारण भय, भ्रांतियां और सामाजिक भेदभाव देखने को मिलता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जनपद स्तर पर एक विशेष जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया। इस अभियान के तहत लोगों को बीमारी के कारणों, बचाव के उपायों, समय पर जांच एवं उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सही जानकारी और संवेदनशील सोच ही किसी भी बीमारी से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है और जागरूक समाज ही भेदभाव व डर को समाप्त कर सकता है।
समाजसेवी मानवेन्द्र सिंह चौहान ‘मनु’ का यह मानवीय कार्य न केवल पीड़ित बच्चों के लिए संबल बना, बल्कि समाज को यह भी संदेश देता है कि मानवीय संवेदना और सामाजिक जागरूकता से ही एक स्वस्थ, सशक्त और संवेदनशील समाज का निर्माण संभव है।












