राम के नाम पर सत्ता भी ली, अब चढ़ावे पर मौन: कांग्रेस

राम के नाम पर सत्ता भी ली, अब चढ़ावे पर मौन: कांग्रेस

राम मंदिर चंदा और चढ़ावा मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो, जवाबदेही तय करे केंद्र: रविंद्र चौबे

कांग्रेस की प्रेस वार्ता : भाजपा-आरएसएस पर आस्था के नाम पर राजनीति और चढ़ावे में कथित अनियमितता का आरोप,

जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू

बेमेतरा। जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय राजीव भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता रविंद्र चौबे ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे तथा मंदिर में प्राप्त चढ़ावे को लेकर भाजपा, आरएसएस और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं, लेकिन उनके नाम पर जुटाई गई श्रद्धालुओं की पूंजी और विश्वास के साथ कथित रूप से गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष आशीष छाबड़ा ने भी संबोधित किए ।
आगे रविंद्र चौबे ने कहा कि देश के गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और आम श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई, गहने और बचत भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए समर्पित की थी। भाजपा और संघ परिवार ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन चलाकर देशभर से चंदा एकत्र किया और उसी जनभावना के आधार पर राजनीतिक लाभ भी प्राप्त किया। अब मंदिर बनने के बाद करोड़ों रामभक्त यह जानना चाहते हैं कि मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और मंदिर में मिलने वाले चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि रामशिला पूजन अभियान के दौरान 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्रित की गई थी, लेकिन उसका विस्तृत लेखा-जोखा आज तक सार्वजनिक नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मंदिर निर्माण के चंदे को लेकर सवाल उठे और अब मंदिर के चढ़ावे में भी कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल आर्थिक गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय है। पूर्व मंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की देखरेख में हुआ था। ऐसे में यदि ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लग रहे हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपनी नैतिक जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को अपनी व्यवस्था पर भरोसा है तो उसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख सवाल भी रखे। पहला, यदि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की निगरानी में हुआ तो कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी कौन लेगा? दूसरा, यदि सब कुछ पारदर्शी था तो तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए? तीसरा, यदि कोई गड़बड़ी नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से आखिर डर किस बात का है? रविंद्र चौबे ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे पूरे मामले को और गंभीर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वित्तीय पारदर्शिता और लेखा-जोखा की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। उन्होंने ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष आशीष छाबड़ा ने राम मंदिर से जुड़े बड़े आयोजनों के खर्च पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह और बाद के अन्य आयोजनों में करोड़ों रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। साथ ही फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे के लेखा-जोखा में गड़बड़ी तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं जैसे आरोप भी सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई है। प्रेस वार्ता के अंत में कहा कि कांग्रेस श्रद्धालुओं के धन और विश्वास की पारदर्शिता की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि देश यह जानना चाहता है कि पूरे मामले पर केंद्र सरकार मौन क्यों है और ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी। कांग्रेस ने मांग की कि पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बद्रीनाथ मंदिर दान मामले का भी किया उल्लेख

कांग्रेस नेता ने कहा कि केवल राम मंदिर ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े हालिया दान घोटाले ने भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उनका कहना था कि इतनी कड़ी सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और बहुस्तरीय व्यवस्था के बावजूद इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमितताएं बिना प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के संभव नहीं हो सकतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे लेना, छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी करना और सीमित कार्रवाई करना केवल लीपापोती का प्रयास प्रतीत होता है, ताकि बड़े जिम्मेदार लोगों तक जांच की आंच न पहुंचे।

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