ऑडिट रिपोर्ट मांगी तो मिला जवाब – डेढ़ साल से नहीं हुआ जनपद पंचायत बेमेतरा का ऑडिट!
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जनपद पंचायत बेमेतरा ने लिखित रूप से स्वीकार किया है कि 01 जनवरी 2025 से 04/06/2026 तक जनपद पंचायत का ऑडिट संपादित ही नहीं हुआ है, जिसके कारण आवेदक को ऑडिट रिपोर्ट एवं ऑडिट आपत्तियों संबंधी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।आवेदक ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जनपद पंचायत बेमेतरा से नवीनतम ऑडिट रिपोर्ट, ऑडिट आपत्तियों की सूची, आपत्तियों के निराकरण, वित्तीय अनियमितताओं पर की गई कार्रवाई तथा वसूली की स्थिति से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। इसके जवाब में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बेमेतरा द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आवेदक द्वारा मांगी गई अवधि में जनपद पंचायत बेमेतरा का ऑडिट संपादित नहीं हुआ है, इसलिए जानकारी निरंक है। इस जवाब के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत के माध्यम से विभिन्न विकास कार्यों, निर्माण कार्यों और शासकीय योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक ऑडिट नहीं होना वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जानकारों का कहना है कि ऑडिट शासकीय वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऑडिट के माध्यम से यह पता चलता है कि योजनाओं में राशि का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं तथा कहीं कोई वित्तीय अनियमितता तो नहीं हुई। ऐसे में यदि लंबे समय से ऑडिट नहीं हुआ है तो यह जांच का विषय हो सकता है। आरटीआई आवेदक ने कहा कि वे इस मामले में आगे भी जानकारी प्राप्त करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उच्च अधिकारियों से शिकायत कर जनपद पंचायत के लंबित ऑडिट की स्थिति स्पष्ट कराने का प्रयास करेंगे।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनपद पंचायत के माध्यम से लगातार शासकीय धन खर्च हो रहा है, तब उसका नियमित ऑडिट क्यों नहीं हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? यह प्रश्न आम जनता के साथ-साथ प्रशासन के लिए भी विचारणीय बन गया है।












