जब प्राचार्या बनीं खुद पीड़ित, तब जागा मेडिकल कॉलेज प्रशासन
लचर व्यवस्थाओं पर टूटी चुप्पी, लिफ्ट कांड से मचा हड़कंप
स्टेट संवाददाता विष्णु रावत
एटा: एटा मेडिकल कॉलेज की वर्षों पुरानी अव्यवस्थाएं उस समय सुर्खियों में आ गईं, जब खुद कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रजनी पटेल को उन्हीं समस्याओं से दो-चार होना पड़ा जिनका सामना आम मरीज और उनके तीमारदार रोज करते हैं।
सोमवार को कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचीं डॉ. पटेल जब लिफ्ट से ऊपर जाने लगीं, तो पता चला कि कॉलेज की चारों लिफ्टें खराब हैं। लिफ्ट के बाहर एक नोटिस चस्पा था, जिस पर लिखा था:
“कल शाम 5 बजे से चारों लिफ्टें खराब हैं।”
इस दृश्य को देख प्राचार्या का पारा चढ़ गया। उन्हें मजबूरन सीढ़ियों से पैदल चढ़कर पांचवीं मंजिल तक पहुंचना पड़ा। कार्यक्रम स्थल पर पसीने से तर-बतर पहुंची डॉ. पटेल ने मौके पर ही संबंधित कर्मचारियों को फटकार लगाई और लापरवाही दर्शाने वाले नोटिस को फाड़ने का आदेश दिया।
उन्होंने सीसीटीवी फुटेज खंगालने और लिफ्ट रख-रखाव में लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. एस. चंद्रा को चेतावनी देते हुए कहा कि मरीजों की अनदेखी और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पहले भी रहे हैं विवादों में
एटा मेडिकल कॉलेज पहले भी कई गंभीर लापरवाहियों के चलते विवादों में रहा है। इनमें प्रमुख घटनाएं शामिल हैं:
डॉक्टरों की समय पर अनुपस्थिति,मरीजों को बिना देखे लौटा देना,गर्भवती महिलाओं का गेट पर ही प्रसव होना, सीवीसी मशीन की चोरी जैसे मामले।
इन घटनाओं के बाद भी प्रशासन ने कभी ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए।
जब खास को हुई तकलीफ, तब सुनी गई आम की बात
कॉलेज में लिफ्टें पहले भी बार-बार खराब होती रही हैं, लेकिन मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों को हमेशा अनदेखा किया गया। अब जब खुद प्राचार्या को उसी परेशानी का सामना करना पड़ा, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के तीमारदारों ने उम्मीद जताई है कि यह घटना कॉलेज प्रशासन के लिए चेतावनी बने और व्यवस्थाओं में सिर्फ कागज़ी नहीं, जमीनी सुधार भी नजर आएं।
“जब पीड़ित खास हो, तो सिस्टम जल्दी सुनता है — अब आम मरीज को भी न्याय मिलने की उम्मीद है।”
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