खाद्य विभाग की लापरवाही या सिस्टम की दुहाई?

खाद्य विभाग की लापरवाही या सिस्टम की दुहाई?

लालगंज की 53 ग्राम पंचायतों में अंत्योदय कार्डों की जांच की मांग, वर्षों पुराने कार्डों पर उठे गंभीर सवाल

मिर्जापुर/लालगंज। केंद्र की भाजपा सरकार और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा गरीब, वंचित, असहाय एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए लगातार संचालित की जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं ने देश और प्रदेश के करोड़ों परिवारों को सरकारी सहायता से जोड़ने का काम किया है। खाद्य सुरक्षा से लेकर आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक सरकार का जोर इस बात पर रहा है कि जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए।

इसी गरीब कल्याण की भावना के तहत खाद्य एवं रसद विभाग के माध्यम से पात्र परिवारों को सरकारी खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित अंत्योदय योजना पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। मिर्जापुर जिले के लालगंज ब्लॉक की 53 ग्राम पंचायतों में अंत्योदय राशन कार्डों के जरिए कथित रूप से अपात्र लोगों को लंबे समय से सरकारी राशन का लाभ मिलने के आरोप सामने आने के बाद खाद्य एवं रसद विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

ग्रामीणों का कहना है कि अंत्योदय योजना का वास्तविक उद्देश्य उन परिवारों तक सरकारी खाद्यान्न पहुंचाना है, जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं और जिनके पास जीवन-यापन के पर्याप्त साधन नहीं हैं। लेकिन यदि पात्रता से बाहर हो चुके परिवार आज भी अंत्योदय कार्ड के माध्यम से सरकारी राशन का लाभ उठा रहे हैं, तो यह व्यवस्था की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

वर्षों पुराने अंत्योदय कार्डों का आज तक सत्यापन क्यों नहीं?

जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 20 से 25 वर्ष पहले जारी किए गए अंत्योदय राशन कार्डों में क्या इतने वर्षों के दौरान एक भी परिवार अपात्र नहीं हुआ? समय के साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति बदलती है, परिवार के सदस्यों की संख्या बदलती है, रोजगार और आय के साधन बदलते हैं तथा कई परिवारों की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हो जाती है। ऐसे में पुराने कार्डों का समय-समय पर सत्यापन होना बेहद जरूरी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर लंबे समय से कार्डों का वास्तविक भौतिक सत्यापन और पात्रता की गंभीर जांच नहीं होने के कारण ऐसे परिवार भी योजना का लाभ लेते रह सकते हैं, जो वर्तमान परिस्थितियों में अंत्योदय योजना की पात्रता के दायरे में नहीं आते।

सचिव और कोटेदार की भूमिका पर भी उठे सवाल

लालगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत स्तर पर सत्यापन व्यवस्था और राशन वितरण प्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी अपात्र परिवार को लंबे समय से अंत्योदय कार्ड के आधार पर राशन मिल रहा है, तो इसकी जानकारी संबंधित स्तर पर क्यों नहीं सामने आई?

ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कार्ड की पात्रता का सत्यापन कौन करता है? राशन वितरण के दौरान कार्ड की स्थिति और लाभार्थी की पात्रता की निगरानी किस स्तर पर होती है? यदि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति बदल चुकी है तो उसका कार्ड सामान्य श्रेणी में परिवर्तित करने अथवा अपात्र होने पर निरस्त करने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?

हालांकि, सचिव या कोटेदार की मिलीभगत अथवा किसी प्रकार के आर्थिक लेन-देन के आरोपों की स्वतंत्र जांच के बिना पुष्टि नहीं की जा सकती। इसलिए ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

“गांधी जी का कमाल” कहकर व्यवस्था पर तंज

ग्रामीणों में चर्चा है कि यदि पात्रता के मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले लोगों को भी वर्षों से अंत्योदय योजना का लाभ मिल रहा है तो आखिर इसके पीछे वजह क्या है? कुछ लोगों ने व्यवस्था पर तंज कसते हुए इसे “सिस्टम की मेहरबानी या गांधी जी का कमाल” तक करार दिया। हालांकि इन चर्चाओं की वास्तविकता जांच का विषय है।

जनता का कहना है कि सरकारी योजना में भ्रष्टाचार या अनियमितता की आशंका को केवल चर्चा के स्तर पर छोड़ने के बजाय विभाग को रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए।

गरीबों के हक का राशन अपात्रों तक पहुंचा तो जिम्मेदार कौन?

अंत्योदय योजना में प्रत्येक पात्र परिवार के हिस्से का खाद्यान्न महत्वपूर्ण है। यदि कोई अपात्र व्यक्ति लंबे समय तक इस योजना का लाभ लेता है, तो इसका सीधा असर उन गरीब परिवारों पर पड़ सकता है, जो वास्तव में सरकारी सहायता के हकदार हैं।

इसी को लेकर ग्रामीणों ने जिला खाद्य एवं रसद विभाग से मांग की है कि लालगंज ब्लॉक की सभी 53 ग्राम पंचायतों में अंत्योदय राशन कार्डों का विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाए। पुराने कार्डों की सूची तैयार कर वर्तमान स्थिति का सत्यापन कराया जाए और जिन परिवारों की पात्रता समाप्त हो चुकी है, उनके कार्डों की नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

हर ग्राम पंचायत में नोटिस देकर हो सार्वजनिक जांच

ग्रामीणों की मांग है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में नोटिस जारी कर अंत्योदय कार्डधारकों की सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर भी पात्रता को लेकर आपत्तियां और दावे सामने आ सकें। इसके बाद संबंधित विभागीय अधिकारियों की निगरानी में दस्तावेजों और वास्तविक परिस्थितियों का सत्यापन कराया जाए।

जनता का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो वास्तविक पात्र और अपात्र लाभार्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों को नियमानुसार योजना से हटाकर वास्तविक गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों को अंत्योदय योजना का लाभ दिलाया जाना चाहिए।

उच्च अधिकारियों से जांच की मांग

अब ग्रामीणों की नजर जिला खाद्य एवं रसद विभाग के उच्च अधिकारियों पर है। लोगों का कहना है कि मामला केवल एक-दो कार्डों तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि शिकायतें सामने आ रही हैं तो पूरे लालगंज ब्लॉक की 53 ग्राम पंचायतों में अंत्योदय कार्डों की व्यापक जांच कराई जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच के दौरान कार्ड जारी होने की तारीख, परिवार की वर्तमान आर्थिक स्थिति, परिवार के सदस्यों की संख्या, पात्रता संबंधी दस्तावेज, राशन वितरण का रिकॉर्ड और कार्ड में दर्ज लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खाद्य विभाग वर्षों पुराने अंत्योदय कार्डों का निष्पक्ष सत्यापन कराएगा? क्या अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों को योजना से बाहर कर वास्तविक गरीबों को उनका हक दिलाया जाएगा? या फिर सरकारी सिस्टम की फाइलों में सब कुछ ठीक चलता रहेगा और जमीन पर वही पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी?

इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई से ही सामने आएगा।

ये भी पढ़ें Pratapgarh: नाले में नहाने गया 18 वर्षीय युवक डूबा, तलाश जारी

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें