प्रतापगढ़ पुलिस ने बरामद किए 147 गुम मोबाइल, 23.52 लाख रुपये कीमत के फोन मालिकों को सौंपे
CEIR पोर्टल से मोबाइल बरामदगी में प्रतापगढ़ पुलिस की रैंकिंग में सुधार, सितंबर में प्रदेश में पांचवीं रैंक
संवाददाता विनय कुमार मिश्रा प्रतापगढ़ पुलिस ने गुम और खोए हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के अभियान में सितंबर माह के दौरान 147 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 23 लाख 52 हजार रुपये बताई गई है। सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को पुलिस लाइन स्थित साईं कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर और अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) आलोक कुमार ने बरामद मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपे।
अपने खोए हुए मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरे खिल उठे। लाभार्थियों ने प्रतापगढ़ पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए अधिकारियों और पुलिस टीम के प्रति आभार जताया।
पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर और अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) आलोक कुमार के निर्देशन में सर्विलांस सेल और जनपद के विभिन्न थानों की साइबर टीमों द्वारा मोबाइल फोन बरामदगी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। तकनीकी सहायता और CEIR पोर्टल के माध्यम से सितंबर माह में कुल 147 मल्टीमीडिया मोबाइल फोन बरामद किए गए।
पुलिस के अनुसार, CEIR पोर्टल पर मोबाइल ट्रेसबिलिटी के आधार पर बरामदगी के मामले में प्रतापगढ़ की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। अप्रैल माह में जनपद की रैंकिंग 40वीं थी, जो सितंबर में सुधरकर पांचवीं हो गई। इस प्रकार जनपद ने 35 पायदान की छलांग लगाई। सितंबर में पोर्टल पर जनरेट हुई ट्रेसबिलिटी के सापेक्ष 85 प्रतिशत मोबाइल फोन बरामद किए गए।
मोबाइल गुम होने पर CEIR पोर्टल पर करें शिकायत
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने लोगों से अपील की कि मोबाइल फोन गुम या चोरी होने पर तत्काल संबंधित थाने में सूचना दें और CEIR पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित CEIR पोर्टल मोबाइल के IMEI नंबर के आधार पर गुम या चोरी हुए फोन को ब्लॉक करने में मदद करता है, जिससे उसके दुरुपयोग को रोका जा सकता है।
आमजन ceir.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस और तकनीकी टीमें मोबाइल की तलाश एवं बरामदगी के लिए आवश्यक कार्रवाई करती हैं।
सितंबर माह में कुल 147 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 23 लाख 52 हजार रुपये है। सभी फोन सत्यापन के बाद उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपे गए।











