आतंकवादियों के निर्माण की फैक्ट्रियां हैं मदरसे, इन पर प्रतिबंध लगना चाहिए: ईश्वर दास ब्रह्मचारी

आतंकवादियों के निर्माण की फैक्ट्रियां हैं मदरसे, इन पर प्रतिबंध लगना चाहिए: ईश्वर दास ब्रह्मचारी

संवाददाता पवन सूर्यवंशी फर्रुखाबाद

फर्रुखाबाद| आवास विकास कालोनी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हिंदू सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने समाज, शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक परंपराओं पर अपने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन में बड़ी संख्या में संघ पदाधिकारी, संत-महात्मा और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कुछ वक्ताओं ने मदरसों को लेकर विवादित बयान भी दिए, जिन पर चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने गुरुकुल पद्धति को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के माध्यम से बच्चों में संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मदरसों की निगरानी और नियंत्रण की बात कही और समाज की एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत ईश्वर दास ब्रह्मचारी ने सनातन परंपरा की रक्षा और समाज की एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को एक सूत्र में बांधकर सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करनी होगी। अपने संबोधन में उन्होंने मदरसों को लेकर कड़े शब्दों का प्रयोग किया और उन पर प्रतिबंध की मांग की, जिससे कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। सम्मेलन में वक्ताओं ने समाज को जागरूक और संगठित रहने का संदेश दिया। हालांकि मदरसों को लेकर दिए गए बयानों को लेकर विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और आयोजकों ने इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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